झारखंड की जनता एम्बुलेंस नहीं, सिस्टम की लाश ढो रही है- भाजपा

Ranchi: झारखंड की बदहाल एम्बुलेंस सेवा को लेकर भाजपा ने राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग पर जोरदार हमला बोला है. भाजपा प्रदेश...

Ranchi: झारखंड की बदहाल एम्बुलेंस सेवा को लेकर भाजपा ने राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग पर जोरदार हमला बोला है. भाजपा प्रदेश प्रवक्ता अजय शाह ने आरोप लगाया कि राज्य में एम्बुलेंस खरीद से लेकर उसके संचालन तक भ्रष्टाचार, अव्यवस्था और तुष्टिकरण का खेल चला है. उन्होंने कहा कि सरकार के दावों के बावजूद मरीजों को समय पर एम्बुलेंस नहीं मिल रही और कई इलाकों में लोग मरीजों को खाट, ठेला और कंधों पर अस्पताल पहुंचाने को मजबूर हैं.

दूरबीन लेकर एम्बुलेंस खोज रही जनता- अजय साह

अजय साह ने कहा कि वर्ष 2022 में करीब 55 करोड़ रुपये खर्च कर 206 एम्बुलेंस खरीदी गई थीं. इसके बाद फरवरी 2026 में 80 करोड़ रुपये की लागत से 237 नई एम्बुलेंस खरीदने का टेंडर जारी हुआ. भाजपा का दावा है कि इन आंकड़ों के हिसाब से राज्य में 500 से ज्यादा एम्बुलेंस उपलब्ध होनी चाहिए, लेकिन जमीन पर स्थिति बिल्कुल उलट है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आज जनता दूरबीन लेकर एम्बुलेंस खोज रही है.

ठेका प्रक्रिया पर उठाए सवाल

भाजपा ने आरोप लगाया कि एम्बुलेंस संचालन का ठेका नियम और योग्यता के आधार पर नहीं, बल्कि राजनीतिक संरक्षण और तुष्टिकरण की नीति के तहत दिया गया. पार्टी का कहना है कि संचालन एजेंसी के दौरान चालक और कर्मचारियों की लगातार हड़ताल होती रही, वेतन भुगतान को लेकर विवाद बढ़ते रहे और स्वास्थ्य सेवा पूरी तरह प्रभावित होती रही.

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“कागजों में दौड़ती रहीं खराब एम्बुलेंस”

अजय साह ने दावा किया कि कई एम्बुलेंस महीनों तक खराब हालत में खड़ी रहीं. कुछ वाहनों के इंजन तक गायब थे, लेकिन कागजों में उन्हें चालू दिखाकर भुगतान निकाला जाता रहा. भाजपा ने इसे “स्वास्थ्य सेवा के नाम पर संगठित लूट” करार दिया.

CAG की आपत्ति का भी जिक्र

उन्होंने कहा कि भाजपा लगातार इस मुद्दे को उठाती रही, जिसके दबाव में आखिरकार स्वास्थ्य विभाग को 25 मई को संबंधित संस्था के साथ किया गया एग्रीमेंट रद्द करना पड़ा. भाजपा ने सवाल उठाया कि जब व्यवस्था सही थी तो सरकार को अचानक यह फैसला क्यों लेना पड़ा. भाजपा ने यह भी आरोप लगाया कि एम्बुलेंस खरीद प्रक्रिया पहले से ही सवालों के घेरे में रही है. पार्टी के अनुसार CAG ने भी खरीद प्रक्रिया पर आपत्ति जताई थी और पूछा था कि आखिर बस निर्माण करने वाली कंपनी को एम्बुलेंस निर्माण का ठेका कैसे दिया गया.

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