हजारीबाग के सतेधिरी जंगल में पत्थर पर बनी ‘सप्तनाग’ की आकृति, आस्था और विज्ञान के बीच छिड़ी चर्चा

Hazaribagh : टाटीझरिया प्रखंड के बिशाय स्थित सतेधिरी जंगल पिछले काफी समय से श्रद्धालुओं और जिज्ञासुओं का केंद्र बना हुआ है. जंगल...

Hazaribagh : टाटीझरिया प्रखंड के बिशाय स्थित सतेधिरी जंगल पिछले काफी समय से श्रद्धालुओं और जिज्ञासुओं का केंद्र बना हुआ है. जंगल में एक विशाल पत्थर पर उभरी सात नागों जैसी आकृति को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल है. स्थानीय लोग इसे दिव्य संकेत और नाग देवता का स्वरूप मानते हैं, जिसके बाद यहां श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती रहती है.

नाग देवता के रूप में की जा रही पूजा-अर्चना

ग्रामीणों के अनुसार पत्थर पर उभरी आकृति सात फनों वाले नाग की तरह दिखाई देती है. आकृति के दर्शन के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग जंगल पहुंचते हैं. श्रद्धालु पास से बहने वाली नदी से जल लाकर आकृति पर अर्पित करते हैं तथा अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए मन्नतें मांगते हैं.

क्षेत्र में बना कौतूहल का विषय

आकृति के सामने आने के बाद गांवों में इसकी चर्चा तेजी से फैल गई है. लोग परिवार और परिचितों के साथ जंगल पहुंचकर इस अनोखे दृश्य को देखने पहुंचते हैं. कुछ श्रद्धालुओं का दावा है कि यह कोई सामान्य आकृति नहीं, बल्कि प्रकृति के माध्यम से मिला दैवीय संदेश है.

विशेषज्ञों और प्रबुद्ध लोगों की अलग राय

हालांकि, इस घटना को लेकर सभी लोगों की राय एक जैसी नहीं है. विज्ञान और प्राकृतिक प्रक्रियाओं को महत्व देने वाले लोगों का कहना है कि पत्थरों पर समय के साथ होने वाले प्राकृतिक कटाव, बारिश, हवा और अन्य भौगोलिक कारणों से कई बार ऐसी आकृतियां स्वतः उभर आती हैं. उनके अनुसार इसे चमत्कार मानने से पहले वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी देखने की आवश्यकता है.

आस्था बनाम तर्क की चर्चा जारी

सतेधिरी जंगल में उभरी यह आकृति फिलहाल आस्था और तर्क दोनों के केंद्र में है. एक ओर श्रद्धालु इसे नाग देवता की कृपा मानकर पूजा-अर्चना कर रहे हैं, तो दूसरी ओर कुछ लोग इसे प्रकृति की अनोखी कारीगरी बता रहे हैं. वजह चाहे जो भी हो, लेकिन इस रहस्यमयी आकृति ने पूरे इलाके का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लिया है.

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