Hazaribagh. झारखंड के उत्तरी छोटा नागपुर प्रक्षेत्र में सट्टेबाजी का खेल अब सिर्फ एक बुराई नहीं, बल्कि एक संगठित ‘अंडरवर्ल्ड’ बन चुका है. आईपीएल के सीजन में सट्टे का यह काला कारोबार अपने चरम पर है. ताजा खुलासे के अनुसार, जेएसआर ग्रुप के साथ-साथ रांची के बिट्टू और हजारीबाग के मयंक व प्रिंस जैसे नाम इस सिंडिकेट को चलाने वाले मुख्य चेहरों के रूप में उभरे हैं. मोबाइल की स्क्रीन पर शुरू होने वाला यह खेल युवाओं को अर्श से फर्श पर ला रहा है.
गोवा से हजारीबाग तक ‘रिमोट कंट्रोल’ नेटवर्क
सूत्रों और पुलिस जांच के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क का मास्टर कंट्रोल गोवा और बेंगलुरु जैसे शहरों से संचालित हो रहा है. हजारीबाग के कानी बाजार, दिपुगढ़ा, हरनगंज और रामनगर इस सिंडिकेट के प्रमुख ‘हॉटस्पॉट’ बन चुके हैं. यहां के एजेंट व्हाट्सएप और टेलीग्राम के जरिए युवाओं को सट्टेबाजी की आईडी देते हैं और करोड़ों का ट्रांजेक्शन डिजिटल वॉलेट और बैंकिंग चैनलों के जरिए किया जा रहा है.
प्रमुख संचालक और उनके गुर्गे
हजारीबाग में यहां से मयंक और प्रिंस, सट्टेबाज ‘केडी’ के साथ मिलकर काम देख रहे हैं. रांची का बिट्टू इस नेटवर्क का बड़ा खिलाड़ी है, जिसका काम सूरज और शशि संभाल रहे हैं. सट्टेबाज ऋषभ का भी अपना एक अलग सिंडिकेट है, जिसके पास काम करने वाले गुर्गों की लंबी फेहरिस्त है.
अवैध कमाई से होटल और जमीन में निवेश
कभी फांकाकशी करने वाले और बेरोजगार रहे ये युवा आज करोड़ों के मालिक बन बैठे हैं. सट्टे से होने वाली इस अवैध कमाई को सफेद करने के लिए बड़े पैमाने पर जमीन, होटल और अन्य व्यवसायों में निवेश किया जा रहा है. साइबर सेल की टीम अब इन सटोरियों के कॉल रिकॉर्ड्स खंगाल रही है ताकि इनके पूरे नेटवर्क को ध्वस्त किया जा सके.
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बर्बादी का मंजर: लाखों की बात करने वाले 100-200 के मोहताज
रिपोर्ट्स बताती हैं कि सट्टे की लत ने कई घरों को तबाह कर दिया है. जो लोग कल तक लाखों की बात करते थे, आज वे कर्ज के बोझ तले दबकर ₹100-₹200 के लिए मोहताज हो गए हैं. इचाक में हुई 1.5 करोड़ रुपये की छापेमारी ने यह साबित कर दिया है कि यह जाल कितना गहरा है. अब इस सिंडिकेट में साइबर अपराधी, अकाउंट हैकर और सेक्सटॉरशन से जुड़े अपराधी भी शामिल हो रहे हैं.
पुलिस की रडार पर सटोरिये, कई फरार
आईजी शैलेंद्र कुमार सिन्हा द्वारा हाल ही में ली गई समीक्षा बैठक के बाद पुलिस ने दबिश बढ़ाई है. कार्रवाई के डर से कई मुख्य सटोरिये शहर छोड़कर दिल्ली, गोवा और बेंगलुरु भाग चुके हैं, लेकिन पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे केवल स्थान बदल रहे हैं, धंधा नहीं. पुलिस अब इनके विरुद्ध सीसीए और एनएसए जैसी कड़ी धाराओं के तहत कार्रवाई करने की तैयारी में है.
