Hazaribagh: शहर में खास महल की जमीनों के सर्वे के बीच उठे ऐतिहासिक कुओं के गायब होने के सवाल ने अब प्रशासन का भी ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. शहर के 17 सार्वजनिक और ऐतिहासिक कुओं के अस्तित्व पर उठे सवालों के बाद नगर निगम ने इनकी तलाश और जांच की प्रक्रिया शुरू करने का संकेत दिया है.
नगर निगम करेगा जांच
नगर आयुक्त ओम प्रकाश गुप्ता ने कहा है कि पुराने सरकारी अभिलेखों, नक्शों और राजस्व दस्तावेजों की मदद से यह पता लगाया जाएगा कि ये कुएं कहां स्थित थे और वर्तमान में उनकी जमीन की स्थिति क्या है. शहर में वर्षों से चर्चा रही है कि अंग्रेजी शासनकाल में आम लोगों और राहगीरों की सुविधा के लिए बनाए गए कई सार्वजनिक कुएं धीरे-धीरे गायब हो गए. इनमें से अधिकांश कुओं का अब कोई स्पष्ट चिन्ह नहीं बचा है. कई स्थानों पर बाजार, दुकानें और पक्के निर्माण खड़े हैं, जबकि कुछ जगहों पर लोगों को यह भी जानकारी नहीं है कि वहां कभी कोई सार्वजनिक जलस्रोत हुआ करता था.

प्रशासनिक हलचल तेज
खास महल जमीनों के सर्वेक्षण के दौरान जब ऐतिहासिक कुओं और तालाबों के अस्तित्व का मुद्दा सामने आया तो नगर निगम ने इसे गंभीरता से लिया. नगर आयुक्त ने स्पष्ट किया कि शहर के पुराने नक्शे, नगर निकाय के रिकॉर्ड, राजस्व अभिलेख और अन्य सरकारी दस्तावेजों की जांच कराई जाएगी. उन्होंने कहा कि यदि दस्तावेजों में कुओं का उल्लेख मिलता है तो उनकी वर्तमान स्थिति की भी पड़ताल की जाएगी.
अतिक्रमण की भी होगी पड़ताल
उन्होंने कहा कि यह देखा जाएगा कि संबंधित जमीन पर वर्तमान में क्या है. यदि किसी सार्वजनिक जलस्रोत की भूमि पर अवैध कब्जा या निर्माण पाया जाता है तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा.
नक्शों से मिलेगी जानकारी
नगर निगम की प्राथमिक योजना के अनुसार पुराने सर्वे रिकॉर्ड, बंदोबस्ती नक्शों और राजस्व मानचित्रों का अध्ययन किया जाएगा. इसके बाद उन स्थानों का भौतिक सत्यापन कराया जाएगा, जहां कभी सार्वजनिक कुएं मौजूद थे. सूत्रों के अनुसार कई पुराने नक्शों में शहर के प्रमुख मार्गों और मोहल्लों में स्थित कुओं का उल्लेख होने की संभावना है. इन्हीं अभिलेखों के आधार पर टीम मौके पर जाकर जांच करेगी.
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अंग्रेजी शासन की धरोहर
इतिहासकारों और स्थानीय जानकारों के अनुसार आजादी के समय हजारीबाग शहर में करीब 17 बड़े सार्वजनिक कुएं थे. मेन रोड, गुरु गोविंद सिंह रोड और अन्य प्रमुख इलाकों में स्थित ये कुएं केवल जलस्रोत नहीं, बल्कि सामाजिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा थे. गर्मी के दिनों में राहगीरों की प्यास बुझाने से लेकर स्थानीय आबादी की दैनिक जरूरतों तक, इन कुओं की बड़ी भूमिका थी. लेकिन शहरीकरण और बढ़ते निर्माण कार्यों के बीच एक-एक कर अधिकांश कुएं मिट्टी से भर दिए गए या अतिक्रमण की भेंट चढ़ गए.
तालाबों पर भी सवाल
केवल कुएं ही नहीं, शहर के कई पुराने तालाबों का क्षेत्रफल भी लगातार सिकुड़ता गया. धोबिया तालाब, ओकनी तालाब सहित कई जलस्रोतों पर वर्षों से अतिक्रमण के आरोप लगते रहे हैं. लोगों का मानना है कि पारंपरिक जलस्रोतों के समाप्त होने का सीधा असर भूजल स्तर पर पड़ा है. जल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वाले लोगों का कहना है कि यदि पुराने कुएं और तालाब सुरक्षित रखे गए होते, तो आज शहर को जल संकट और गिरते भूजल स्तर जैसी समस्याओं का सामना कम करना पड़ता.
विरासत और पर्यावरण का मुद्दा
शहर के वरिष्ठ नागरिकों का कहना है कि यह केवल जमीन या अतिक्रमण का मामला नहीं है, बल्कि हजारीबाग की ऐतिहासिक विरासत से जुड़ा विषय है. जिन कुओं ने दशकों तक शहर की सेवा की, उनका अस्तित्व समाप्त हो जाना चिंता का विषय है. उनकी मांग है कि जांच केवल रिकॉर्ड तक सीमित न रहे, बल्कि ऐसे जलस्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन की भी योजना बनाई जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां शहर की इस ऐतिहासिक धरोहर से परिचित हो सकें.
नगर आयुक्त ने क्या कहा
नगर आयुक्त ओम प्रकाश गुप्ता ने कहा कि शहर के पुराने सार्वजनिक कुओं के संबंध में उपलब्ध अभिलेखों की जांच कराई जाएगी. पुराने नक्शों और सरकारी दस्तावेजों के आधार पर यह पता लगाया जाएगा कि कुएं कहां-कहां स्थित थे. यदि आवश्यक हुआ तो स्थल निरीक्षण भी कराया जाएगा और पूरे मामले की विस्तृत जांच होगी.
जांच पर टिकी निगाहें
खास महल सर्वे के बीच उठे इस मुद्दे ने शहर में नई बहस छेड़ दी है. अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन पुराने दस्तावेजों से आखिर क्या तथ्य सामने लाता है और क्या वास्तव में हजारीबाग के ‘लापता’ 17 कुओं का इतिहास फिर से सामने आ पाएगा.
