Click Here
Click Here
Click Here

45 साल पुराना ये गाना आज भी होली की जान ,राज कपूर के लिए अभिताभ बच्चन ने दी थी आवाज

  News Desk:देशभर में होली बड़े उत्साह से मनाई जाती है,और इस त्योहार की असली रौनक म्यूजिक से ही आती है.होली पर...

 

News Desk:देशभर में होली बड़े उत्साह से मनाई जाती है,और इस त्योहार की असली रौनक म्यूजिक से ही आती है.होली पर कई फिल्मी गाने बने ,लेकिन ‘रंग बरसे भीगे चुनर वाली की बात ही अलग है.यह गाना आज भी हर होली पार्टी में सुनने को मिलता है .इसके बोल और अमिताभ बच्चन का अंदाज खास बना देता है.

रंग बरसे’ की पूरी कहानी :कैसे बना होली का सबसे आइकॉनिक गाना ?

होली का नाम आते ही सबसे पहले जिस गाने की धुन कानों में गूंजती है वह है ‘रंग बरसे भीगे चुनर वाली’. यह गाना 1981 में आई फ़िल्म सिलसिला का  हिस्सा था.इस गाने के बोल मशहूर कवि हरिवंश राय बच्चन ने लिखे थे कहा जाता है कि इसकी धुन पारंपरिक लोकभजन से प्रेरित थी.फिल्म में इसे आवाज दी थी अमिताभ बच्चन ने ,जिनका अंदाज और देशी ठुमका गाने की खास पहचान बन गया .

दिलचस्प बात यह है कि यह गाना सिर्फ फिल्मी सीन तक सीमित नहीं रहा,बल्कि हर होली की जान बन गया .आज भी देशभर में होली का जश्न इस गाने के बिना अधूरा माना जाता है.

जब होली की महफिल में गूंजा ‘रंग बरसे’ , वहीं से मिली फिल्म को नई पहचान 

1980 के दौर में RK स्टूडियो की होली पार्टी में राज कपूर ने अमिताभ बच्चन से कुछ अलग सुनाने को कहा.तब अमिताभ ने अपनी खास अंदाज में “रंग बरसे” गाया.यही पल आगे चलकर इस गाने के फिल्मी रूप की प्रेरणा बना.

ऐसे बना होली का सुपरहिट एंथम

उस होली सेलिब्रेशन में फिल्ममेकर यश चोपड़ा भी मौजूद थे,गाना सुनकर वे इतने प्रभावित हुए कि इसे अपनी फिल्म ‘सिलसिला’ में शामिल कर लिया.इसके बाद ‘रंग बरसे’ हर होली की पहचान बन गया.

1981 में रिलीज हुई ‘सिलसिला’ उस दौर की सबसे चर्चित फिल्मों में गिनी जाती है .इसका निर्देशन और निर्माण यश चोपड़ा ने किया था.फिल्म की कहानी एक लेखक अमित(अमिताभ बच्चन) के इर्द गिर्द घूमती है,जो अपनी पत्नी शोभा(जया बच्चन) और पूर्व प्रेमिका चांदनी (रेखा) के बीच उलझ जाता है.पर्दे पर दिखाया गया यह लव ट्राएंगल उस समय काफी चर्चा में रहा और फिल्म को खास पहचान दिलाई.

add1
सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *