West Singhbhum: नोवामुंडी प्रखंड स्थित राजस्व ग्राम सरबिल में रविवार को सामाजिक संस्कृति, दस्तूर एवं नवचेतना जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. गांव की सीमा पर पारंपरिक पत्थरगढ़ी दस्तूर का विधिवत आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण, मानकी, मुंडा, डाकुवा, दिऊरी एवं समाज के प्रबुद्धजन शामिल हुए.
पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने किया शुभारंभ
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने पत्थरगढ़ी अनुष्ठान का उद्घाटन किया. वहीं TSF के हेड संदीप केसरवानी और प्रफुल्ल बोदरा ने फीता काटकर नवचेतना जागरूकता कार्यक्रम की शुरुआत की.
संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण पर जोर
कार्यक्रम में आदिवासी समाज की लुप्त होती परंपराओं, रीति-रिवाजों, जन्म-मृत्यु संस्कार, विवाह परंपरा और पर्व-त्योहारों पर चर्चा हुई. वक्ताओं ने कहा कि विकास के साथ अपनी भाषा, संस्कृति और पारंपरिक पहचान को बचाना भी जरूरी है.
मागे पोरोब सहित पारंपरिक पर्वों पर चर्चा
मागे पोरोब, बाह परब, हेरो परब, जोमना परब और बाबा हेरमोट सहित विभिन्न पारंपरिक पर्वों के धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला गया. साथ ही जोनोम, गोनोए और आणादी दस्तूर की परंपराओं की भी जानकारी दी गई.
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युवाओं से संस्कृति बचाने की अपील
वक्ताओं ने कहा कि नई पीढ़ी अपनी भाषा, संस्कृति और रीति-रिवाजों से दूर होती जा रही है. उन्होंने युवाओं से हो भाषा, पारंपरिक दस्तूर और सांस्कृतिक विरासत को जानने, अपनाने और संरक्षित करने का आह्वान किया. कार्यक्रम का उद्देश्य सामाजिक एकजुटता और हो आदिवासी संस्कृति के संरक्षण का संदेश देना रहा.
