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हजारीबाग के सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में अभिभावकों का भारी हंगामा, आत्मदाह की चेतावनी

Hazaribagh: शहर के कुम्हारटोली स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में सोमवार सुबह उस समय अफरा-तफरी और भारी हंगामे की स्थिति उत्पन्न हो...

हजारीबाग के सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में अभिभावकों का भारी हंगामा

Hazaribagh: शहर के कुम्हारटोली स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में सोमवार सुबह उस समय अफरा-तफरी और भारी हंगामे की स्थिति उत्पन्न हो गई, जब दो दर्जन से अधिक आक्रोशित अभिभावक विद्यालय परिसर के बाहर जमा हो गए. परिजनों का आरोप है कि सरकार द्वारा री-एडमिशन पर रोक लगाए जाने के बावजूद विद्यालय प्रबंधन ‘एनुअल फी’ और ‘वार्षिक शुल्क’ का नाम बदलकर प्रति बच्चा ₹7,500 से ₹8,200 तक की भारी-भरकम राशि वसूल रहा है. सोमवार से ही विद्यालय में पीटी-वन की परीक्षा शुरू हुई है, जिसमें फीस बकाया होने के नाम पर बच्चों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और परीक्षा से वंचित करने का आरोप भी अभिभावकों ने लगाया है. हंगामे के दौरान एक अभिभावक ने मांग पूरी न होने पर आत्मदाह तक की चेतावनी दे डाली है.

कर्ज लेकर भर रहे फीस, दलालों की तरह व्यवहार कर रहा स्कूल

विद्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे अभिभावकों का दर्द और आक्रोश चरम पर दिखे. मेहनत-मजदूरी करने वाले एक अभिभावक ने रोते हुए कहा, “मेरे दो बच्चे यहाँ पढ़ते हैं. मासिक फीस के रूप में हर महीने प्रति बच्चा ₹2,000 से अधिक अलग से देते हैं. अब इस सालाना चार्ज को भरने के लिए ₹18,000 सूद पर कर्ज लेकर आना पड़ा है.” मौजूद महिला अभिभावकों ने कहा कि जब बच्चा इसी स्कूल का है, तो हर साल उससे री-एडमिशन या भारी-भरकम एनुअल चार्ज क्यों लिया जा रहा है? गार्जियनों का आरोप है कि पिछले साल जो चार्ज ₹6,000 था, उसे इस साल बढ़ाकर ₹8,200 कर दिया गया है. विरोध करने पर वर्तमान प्रधानाचार्य सीधे शब्दों में कहते हैं कि ‘पैसे नहीं हैं तो नाम कटवाकर सरकारी स्कूल में लिखा लीजिए, वहां मुफ्त खाना भी मिलेगा. परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि जो गार्जियन मीडिया के सामने आ रहे हैं, बाद में स्कूल के शिक्षक उनके बच्चों को टारगेट कर प्रताड़ित करते हैं.

आत्मदाह की चेतावनी से सहमा माहौल

आक्रोश इस कदर बढ़ गया कि भीड़ में शामिल एक वक्ता अभिभावक ने कैमरे के सामने ऐलान किया, “अगर इस री-एडमिशन और एनुअल चार्ज के खेल को तुरंत बंद नहीं किया गया, तो मैं कल विद्यालय परिसर में आत्मदाह कर लूंगा. अगर मुझे कुछ भी होता है, तो इसके जिम्मेदार सीधे तौर पर प्रधानाचार्य और स्कूल प्रबंधन होंगे.  अभिभावकों ने मांग की है कि स्कूल प्रबंधन उन्हें लिखित रूप से दे कि उनका किस सत्र का कितना बकाया है, क्योंकि वे हर महीने नियत समय पर फीस काउंटर पर जमा करते आए हैं.

प्रधानाचार्य का पक्ष: “री-एडमिशन नहीं, यह प्रांतीय गाइडलाइन के तहत वार्षिक शुल्क है

इस पूरे हंगामे और आरोपों पर जब विद्यालय के प्रधानाचार्य धर्मेद्र कुमार साहू से सीधा सवाल किया, तो उन्होंने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। प्रधानाचार्य ने कहा: “सत्र 2025-26 की समाप्ति के बाद आज 6 जुलाई से नए सत्र (2026-27) की पीटी-वन परीक्षा शुरू हुई है. हमने सिर्फ उन अभिभावकों को टोकने या सूचना देने का निर्देश दिया है जिनका ‘पिछले सत्र’ (2025-26) का पुराना शिक्षण शुल्क बकाया है. जिनका वर्तमान सत्र का शुल्क या वार्षिक चार्ज बाकी है, उन्हें परीक्षा से वंचित नहीं किया जा रहा है. कुछ ऐसे गार्जियन हैं जो जानबूझकर विद्यालय के मासिक शुल्क को दरकिनार करते हैं और जब उनपर दबाव बनता है, तो वे समाज में ‘री-एडमिशन’ के नाम पर दुष्प्रचार कर रहे हैं. धर्मेंद्र कुमार साहू, प्रधानाचार्य ₹8,200 की रसीद के सवाल पर प्रधानाचार्य ने सफाई देते हुए कहा कि यह री-एडमिशन शुल्क नहीं है. हमारा विद्यालय विद्या विकास समिति, झारखंड के दिशा-निर्देशन में संचालित होता है. इस राशि में प्रांतीय गतिविधि शुल्क, परीक्षा शुल्क, उत्सव शुल्क, विद्युत शुल्क और भवन शुल्क जैसे तमाम सालाना खर्चे शामिल होते हैं, जिसे वर्ष में केवल एक बार ‘वार्षिक शुल्क’ के रूप में लिया जाता है. उन्होंने कहा कि विद्यालय का बकायदा ऑडिट होता है और वे किसी भी जांच के लिए तैयार हैं.

उपायुक्त और जिला शिक्षा पदाधिकारी की चौखट पर पहुंचे गार्जियन

घंटों चले हंगामे के बाद पीड़ित अभिभावकों ने साफ किया कि वे इस मनमानी के खिलाफ चुप नहीं बैठेंगे. स्कूल प्रबंधन के असहयोगात्मक रवैये को देखते हुए अभिभावकों का एक प्रतिनिधिमंडल इस पूरे मामले की लिखित शिकायत और न्याय की गुहार लेकर हजारीबाग उपायुक्त एवं जिला शिक्षा पदाधिकारी से मिलने रवाना हुआ. गार्जियनों का कहना है कि जब तक इस दोहरी नीति और मनमाने शुल्क पर शिक्षा विभाग व जिला प्रशासन द्वारा रोक नहीं लगाई जाती, उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा.

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