बहू को गुड़ का बर्तन नीचे रखने पर सास का डांटना और अपशब्द कहना क्रूरता नहीं – HC

Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने वैवाहिक प्रताड़ना से जुड़े एक मामले में बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. अदालत ने स्पष्ट किया है...

झारखंड हाईकोर्ट

Ranchi :  झारखंड हाईकोर्ट ने वैवाहिक प्रताड़ना से जुड़े एक मामले में बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. अदालत ने स्पष्ट किया है कि केवल गुड़ के बर्तन जमीन पर रखने जैसी मामूली बात पर बहू को डांटना या अपशब्द कहना अपने आप में क्रूरता नहीं माना जा सकता. झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की पीठ ने दुमका की फास्ट ट्रैक कोर्ट के उस फैसले को पलट दिया है, जिसमे सास को तीन वर्ष के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई गई थी. हाईकोर्ट ने सास की दोषसिद्धि को पूरी तरह रद्द करते हुए उन्हें बरी कर दिया है. अभियोजन पक्ष के मुताबिक यह मामला करीब 25 साल पुराना है. 20 जनवरी 2001 को मृतका ने घर की दीवार पर ऊंचाई पर रखा गुड़ के शीरे का एक बर्तन उतारकर जमीन पर रख दिया था. इस बात पर नाराज होकर उसकी सास ने उसे डांट दिया और अपशब्द कहे. इस मामूली घरेलू विवाद के बाद बहू ने कथित तौर पर आंगन में जल रहे मिट्टी के चूल्हे से आग उठाकर खुद को लगा ली. जिसके बाद गंभीर रूप से झुलसने के कारण इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी.

निचली अदालत ने आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में किया बरी

पुलिस ने इस मामले में प्रताड़ना के साथ-साथ आत्महत्या के लिए उकसाने की धारा भी जोड़ी थी. हालांकि निचली अदालत ने सास को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप से पहले ही बरी कर दिया था लेकिन प्रताड़ना के आरोप में सास को दोषी करार दिया था. जिसके बाद यह मामला हाईकोर्ट पहुंचा. हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने यह पाया कि क्रूरता तभी मानी जाएगी जब आरोपी का आचरण ऐसा हो जिससे महिला के जीवन, अंग या मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को कोई गंभीर खतरा पैदा होता हो और आरोपी का आचरण महिला को आत्महत्या का कदम उठाने के लिए मजबूर करने वाला हो या फिर महिला को दहेज जैसी किसी अवैध मांग को पूरा करने के लिए प्रताड़ित किया जा रहा हो.

सास के खिलाफ स्पष्ट कृत्य नहीं

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि इस मामले में दहेज की मांग का कोई आरोप नहीं था. गुड़ का शीरा जमीन पर रखने पर डांटने के अलावा सास के खिलाफ कोई अन्य स्पष्ट कृत्य नहीं दर्शाया गया. ग्रामीण जीवन में ऐसी मामूली घटनाएं सामान्य हैं. साथ ही सात साल के वैवाहिक जीवन के दौरान पहले कभी प्रताड़ना दिए जाने का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला.

 

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