हजारीबाग: संयुक्त राष्ट्र के भविष्य पर विभावि में संगोष्ठी, शोधार्थियों ने रखे विचार

Hazaribagh: विनोबा भावे विश्वविद्यालय (विभावि) के राजनीति विज्ञान विभाग में विभागीय प्रशाल में “संयुक्त राष्ट्र का पुनर्गठन एवं प्रासंगिकता” विषय पर संगोष्ठी...

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संयुक्त राष्ट्र के भविष्य पर विभावि में संगोष्ठी
Hazaribagh:  विनोबा भावे विश्वविद्यालय (विभावि) के राजनीति विज्ञान विभाग में विभागीय प्रशाल में "संयुक्त राष्ट्र का पुनर्गठन एवं प्रासंगिकता" विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष डॉ. सुकल्याण मोइत्रा ने की. संगोष्ठी का उद्देश्य शोधार्थियों और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शोध पत्र तैयार करने की प्रक्रिया से अवगत कराना और समकालीन वैश्विक विषयों पर उनकी अकादमिक समझ को विकसित करना था. कार्यक्रम के दौरान विभिन्न शोधार्थियों ने संयुक्त राष्ट्र से जुड़े अलग-अलग विषयों पर अपने शोध आलेख प्रस्तुत किए.

शोधार्थियों ने संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न पहलुओं पर रखे विचार

जाकिर अंसारी ने संयुक्त राष्ट्र की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला, जबकि नीरज कुमार वर्मा ने संगठन की उपलब्धियों पर शोध पत्र प्रस्तुत किया. संजना मासूम ने संयुक्त राष्ट्र के सामने मौजूद वर्तमान चुनौतियों का विश्लेषण किया और धर्मेंद्र कुमार ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव की भूमिका पर अपने विचार रखे.वहीं स्वाति कुमारी ने संयुक्त राष्ट्र में भारत की भूमिका और वैश्विक मंच पर उसकी बढ़ती भागीदारी पर चर्चा की. सौरभ कुमार ने “संयुक्त राष्ट्र और विश्व की प्रमुख शक्तियां” विषय पर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में महाशक्तियों की भूमिका का विश्लेषण किया. संगोष्ठी के संयोजक सुधरता महेंद्र पंडित ने संयुक्त राष्ट्र की वर्तमान प्रासंगिकता पर अपना आलेख प्रस्तुत किया.

शोध पत्र लेखन की तकनीक पर दिए महत्वपूर्ण सुझाव

संगोष्ठी का संचालन विभागीय प्राध्यापक डॉ. अशोक राम की देखरेख में हुआ. उन्होंने बताया कि पिछले लगभग एक पखवाड़े से शोधार्थियों को स्तरीय शोध आलेख तैयार करने के लिए मार्गदर्शन दिया जा रहा था. उन्होंने विद्यार्थियों को शोध पत्र लेखन की तकनीक, विषय चयन, संदर्भ सामग्री के अध्ययन और तथ्यों के वैज्ञानिक विश्लेषण से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव दिए.

उच्च गुणवत्ता वाले शोध कार्य के लिए प्रेरित किया

डॉ. अशोक राम ने कहा कि बेहतर शोध आलेख तैयार करने के लिए गहन अध्ययन, प्रमाणिक स्रोतों का उपयोग और विषय की व्यापक समझ जरूरी है. उन्होंने कहा कि संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य शोधार्थियों को शोध पत्र लेखन का व्यावहारिक प्रशिक्षण देना है, ताकि वे भविष्य में उच्च गुणवत्ता वाले शोध कार्य कर सकें. कार्यक्रम में राजनीति विज्ञान विभाग के शोधार्थियों के साथ द्वितीय सेमेस्टर के विद्यार्थियों ने भी सक्रिय भागीदारी की. अंत में शोध आलेखों पर विचार-विमर्श किया गया और विद्यार्थियों को भविष्य में ऐसे अकादमिक आयोजनों में भाग लेने के लिए प्रेरित किया गया.

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