Ranchi: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं संयुक्त असैनिक सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा के परिणाम जारी होने के बाद से राज्य में भारी बवाल मचा हुआ है परीक्षा प्रक्रिया, ओएमआर शीट मूल्यांकन और मेरिट लिस्ट में गड़बड़ी के गंभीर आरोपों के बीच अभ्यर्थियों का आक्रोश सड़कों पर देखने को मिल रहा है. विवाद के गहराते ही आयोग के अध्यक्ष एल. खियांगते ने इस्तीफा दे दिया है और पूरे मामले की जांच CID की विशेष जांच टीम को सौंप दी गई है.
क्या है 14वीं JPSC परीक्षा का पूरा विवाद?
– यह विवाद जुलाई 2026 में 14वीं जेपीएससी पीटी परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद शुरू हुआ अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि आयोग ने कट-ऑफ मार्क्स और उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में पारदर्शिता नहीं बरती.
– परीक्षा डेटा प्रोसेसिंग और ओएमआर मूल्यांकन का काम टीडीपीएल (TSR Data Processing Private Limited) नाम के आउटसोर्स एजेंसी को दिया गया था, जो कि पहले से विवादों में रही है. आरोप है कि इस एजेंसी के जरिए अंकों में बड़ा हेरफेर किया गया.
– राजधानी रांची समेत राज्य के विभिन्न हिस्सों में छात्रों के जोरदार विरोध-प्रदर्शन को देखते हुए राज्य सरकार ने मामले की सीआईडी जांच के आदेश जारी किए.
*12 परीक्षाओं पर छाया संकट, 1.70 लाख युवाओं का भविष्य अधर में:*
– इस विवाद का असर राज्य की अन्य नियुक्तियों पर भी पड़ा है.
– आयोग ने पहले से घोषित 9 परीक्षाओं की तिथियां स्थगित कर दी हैं.
– तीन अन्य भर्ती प्रक्रियाओं पर भी अनिश्चितता के बादल छा गए हैं.
– कुल 12 परीक्षाएं प्रभावित होने से करीब 1.70 लाख अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है.
एक नज़र में दूसरे राज्यों की तुलना:
राज्य गठन के 25 वर्षों में झारखंड में केवल 13 सिविल सेवा परीक्षाएं आयोजित हो सकी हैं, जबकि इसी दौरान बने पड़ोसी राज्यों छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड में 21 से अधिक सिविल सेवा परीक्षाएं पूरी कराई जा चुकी हैं.
सीआईडी की अब तक की कार्रवाई:
– छापेमारी से लेकर गिरफ्तारियों तक विवाद बढ़ने के बाद CID और रांची पुलिस की संयुक्त टीम ने तेजी से कार्रवाई शुरू की है.
– 21 जुलाई को सी CID की टीम ने रांची स्थित JPSC कार्यालय और परीक्षा संचालित करने वाली एजेंसी TDPL के कार्यालयों व अन्य ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की.
– जांच टीम ने मौके से महत्वपूर्ण हार्ड डिस्क, सर्वर लॉग, CCTV फुटेज, परीक्षा से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड और ओएमआर शीट के दस्तावेज जब्त किए हैं.
*मामले में संलिप्तता के आधार पर CID ने दस प्रमुख लोगों को गिरफ्तार किया है:*
– अभय तिवारी (मुख्य आरोपी) और उनका सहयोगी अरविंद कुमार
– श्वेता कुमारी गुप्ता (JPSC की पूर्व उप परीक्षा नियंत्रक)
– रामवीर सिंह (TDPL के निदेशक)
– कर्मचारी: मोहम्मद उस्मान, सोनू कुमार हेमंत वर्मा, प्रदीप कुमार सिंह और संजय कुमार
– सभी आरोपियों को अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया गया है, जहां जब्त डिजिटल साक्ष्यों को सामने रखकर उनसे गहन पूछताछ की जा रही है.
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विशेष BNS धाराओं में FIR और आम जनता से अपील:
CID ने भारतीय न्याय संहिता और झारखंड प्रतियोगी परीक्षा (भ्रष्टाचार निवारण और रोकथाम) अधिनियम, 2023 के तहत कांड संख्या 16/2026 दर्ज कर जांच तेज कर दी है. CID ने अभ्यर्थियों और आम जनता से अपील की है कि यदि उनके पास परीक्षा में धांधली, लेन-देन या अन्य किसी भी प्रकार की अनियमितता से जुड़ा कोई सबूत या दस्तावेज है, तो वे सीधे मोबाइल 9934309058 पर साझा कर सकते हैं. सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी.
