देश में 434 खनिज ब्लॉकों की नीलामी, झारखंड में सिर्फ 3, सरकार बताए आखिर क्यों? – बाबूलाल

Ranchi: नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा देश के लगभग 40 प्रतिशत खनिज संसाधन होने के बावजूद राज्य खनन राजस्व, उत्पादन, रोजगार...

RANCHI
BJP की प्रेस वार्ता

Ranchi: नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा देश के लगभग 40 प्रतिशत खनिज संसाधन होने के बावजूद राज्य खनन राजस्व, उत्पादन, रोजगार और नई खदानों की नीलामी में पिछड़ रहा है, जो युवाओं और अर्थव्यवस्था के साथ अन्याय है.चाईबासा के सारंडा क्षेत्र में हालिया दौरे के दौरान स्थिति चिंताजनक दिखी. कई खदानों की लीज समाप्त होने के बाद उनका नवीनीकरण या पुनः नीलामी नहीं हुई, जिससे वे वर्षों से बंद हैं. इसका सीधा असर रोजगार पर पड़ा है, युवाओं का पलायन बढ़ा है और स्थानीय अर्थव्यवस्था ठहर गई है. वे गुरुवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस कांफ्रेस में बोल रहे थे.

आर्थिक गतिविधियों का केंद्र जामदा बाजार आज मंदी का शिकार

जामदा बाजार, जो कभी आर्थिक गतिविधियों का केंद्र था, आज मंदी का शिकार है. आय घटी है, खर्च करने की क्षमता कमजोर हुई है और छोटे व्यापार प्रभावित हैं. जामदा से मात्र 20 किलोमीटर दूर ओडिशा का बड़बिल इसके विपरीत उदाहरण है, जहां समय पर नीलामी, उत्पादन और रोजगार में वृद्धि हुई है. 2019-20 से देश में 434 खनिज ब्लॉकों की नीलामी हुई, जिनमें ओडिशा में 45, छत्तीसगढ़ में 41 और झारखंड में केवल 3 ब्लॉक शामिल हैं. छह वर्षों में इतनी कम नीलामी प्रशासनिक विफलता दर्शाती है, जिससे उत्पादन, रोजगार और राजस्व प्रभावित हुआ है.

खनिजों के उत्पादन पर भी असर

2018-19 से 2024-25 के बीच ओडिशा का लौह अयस्क उत्पादन 120 मिलियन टन से बढ़कर 180 मिलियन टन हुआ, जबकि झारखंड 23 मिलियन टन पर स्थिर रहा. यह खनन प्रबंधन और नीतियों की विफलता को दर्शाता है. राजस्व के मामले में भी झारखंड पीछे है. देश का 40 प्रतिशत खनिज संसाधन होने के बावजूद 2025-26 में राज्य का खनन राजस्व 22,000 करोड़ रहा, जबकि ओडिशा ने 17 प्रतिशत संसाधनों के साथ ₹46,000 करोड़ अर्जित किए.चाईबासा में पत्थर खदानों की स्थिति भी खराब है. नोआमुंडी में 9 में से 7 खदानें बंद हैं. झींकपानी में 1946 से संचालित एसीसी प्लांट 16 अगस्त से बंद होने जा रहा है, जिससे लगभग 1600 परिवार प्रभावित होंगे.

DMFT फंड के उपयोग में भी गंभीर अपारदर्शिता

मरांडी ने कहा कि DMFT फंड के उपयोग में भी गंभीर अपारदर्शिता है. पश्चिमी सिंहभूम में 2016 से 2026 के बीच लगभग 3,700 करोड़ जमा हुए, लेकिन न वार्षिक रिपोर्ट, न बजट, न परियोजनाओं की जानकारी सार्वजनिक है. वेबसाइट पर अंतिम अपडेट 2018 का है.नेता प्रतिपक्ष ने मांग की कि बंद खदानों और पत्थर खदानों की नीलामी शीघ्र पूरी की जाए, खनन गतिविधियों को पुनर्जीवित किया जाए, उत्पादन बढ़ाने की समयबद्ध योजना बनाई जाए, रोजगार सृजन पर ध्यान दिया जाए और डीएमएफटी  फंड का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए.

सारंडा में बुनियादी सुविधाओं का आभाव

मरांडी ने कहा कि सारंडा का जंगल, पश्चिमी सिंहभूम का क्षेत्र खनिज के मामले में काफी धनी है लेकिन सदियों से यहां निवास कर रहे लोगों की स्थिति काफी दयनीय है. विडंबना यह है कि यहां के आयरन ओर से बोकारो स्टील सिटी, टाटा, दुर्गापुर जैसे औद्योगिक शहर तो पूरी तरह स्थापित होकर विकास कर गए परंतु जहां से आयरन ओर निकलता है उस क्षेत्र के हालात, वहां के लोगों के जीवन यापन में आज भी कोई परिवर्तन नहीं आया है. आज भी वहां के लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए ठोकरें खाने को विवश हैं.

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