हजारीबाग लाठीचार्ज पर बाबूलाल मरांडी का हमला, कहा- पुलिस और सरकार की गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं

Hazaribagh: नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने हजारीबाग में जेपीएससी आंदोलन के दौरान हुए लाठीचार्ज को लेकर राज्य सरकार और पुलिस पर तीखा...

Babulal Marandi slams Hazaribagh lathi-charge; says police and government hooliganism will not be tolerated.

Hazaribagh: नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने हजारीबाग में जेपीएससी आंदोलन के दौरान हुए लाठीचार्ज को लेकर राज्य सरकार और पुलिस पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि देश के नागरिकों को धरना-प्रदर्शन करने का वैधानिक अधिकार है. शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे लोगों पर पुलिस की कार्रवाई और गुंडागर्दी किसी भी स्थिति में बर्दाश्त योग्य नहीं है.

जेपीएससी आंदोलन को बताया जायज

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि हजारीबाग में जेपीएससी मामले को लेकर छात्र आंदोलन कर रहे हैं और उनकी मांग जायज है. आंदोलन को दबाने के लिए पुलिस प्राथमिकी दर्ज करना गलत है. उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के लोग मास्क लगाकर छात्रों के आंदोलन को कुचलने का प्रयास कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई स्वीकार्य नहीं है. उन्होंने जेपीएससी के पूर्व सदस्य जमाल अहमद के इस्तीफे और इसके बाद कॉलेज में उनके योगदान के मामले की सरकार से जांच कराने की मांग की. मरांडी ने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्षता के लिए सरकार को सीबीआई जांच करानी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके.

झारखंड बनने के उद्देश्य को समझना होगा

राज्य के विकास पर बाबूलाल मरांडी ने कहा कि झारखंड बनाने के पीछे के उद्देश्य को समझना होगा. उन्होंने कहा कि राज्य बनने से पहले यहां के लोगों को पर्याप्त अवसर नहीं मिलते थे. झारखंड का निर्माण इसी उद्देश्य से हुआ कि यहां के लोगों को आगे बढ़ने का अवसर मिले. उन्होंने कहा कि विकास की कोई अंतिम सीमा नहीं होती. विकास में हमेशा लंबी लकीर खींचने की जरूरत होती है. उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता में न्यूनतम जरूरतों के साथ कानून व्यवस्था, आधारभूत संरचना, सड़क, बिजली और स्वास्थ्य जैसी सुविधाएं होनी चाहिए. इन क्षेत्रों में अभी लंबे समय तक काम करने की आवश्यकता है.

वंदे मातरम के सम्मान पर जोर

वंदे मातरम को लेकर मरांडी ने कहा कि यह देश का राष्ट्रीय गीत है और इसका सम्मान किया जाना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 1937 में कांग्रेस ने मुस्लिम तुष्टिकरण के कारण वंदे मातरम को सेंसर किया था और इसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की भूमिका थी. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस भूल को सुधारने का काम किया है और संसद में इस संबंध में कानून बनाया गया है. मरांडी ने कहा कि राष्ट्र और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को लेकर किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाना चाहिए.

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