विनीत आभा उपाध्याय

रांची: गैंगस्टर सुशील श्रीवास्तव हत्याकांड में निचली अदालत द्वारा दोषी ठहराए गए आरोपियों को बुधवार को हाईकोर्ट ने बाइज्जत बरी कर दिया. झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय और जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने हजारीबाग की निचली अदालत के उम्रकैद के फैसले को पलटते हुए अपने 103 पन्नों के जजमेंट में स्पष्ट किया कि सबूतों के अभाव और गवाहों के बयानों में विरोधाभास के आधार पर सभी दोषियों की सजा रद्द की गई.
गवाहों के बयानों में भारी विरोधाभास
अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ ठोस सबूत पेश करने में विफल रहा. ट्रायल के दौरान जिन गवाहों की गवाही हुई, उनके बयानों में गंभीर विसंगतियां थीं. हाईकोर्ट ने गौर किया कि प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों में काफी अंतर था. कुछ गवाहों ने हमलावरों की संख्या 2 से 3 बताई थी, जबकि घटनाक्रम कुछ और संकेत दे रहा था. वहीं घटना स्थल को लेकर भी गवाहों के बयान आपस में मेल नहीं खा रहे थे.
एक आरोपी घटना के समय जेल में बंद
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी पाया कि निचली अदालत ने जिस एक व्यक्ति को दोषी ठहराया था, वह घटना के समय किसी अन्य मामले में जेल में बंद था. पुलिस और अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर पाए कि मौके पर मौजूद व्यक्ति वही थे जिन्हें आरोपी बनाया गया था.
किन आरोपियों को मिली राहत
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि निचली अदालत से सजा पाए विकास तिवारी, संतोष पांडे, विशाल कुमार सिंह, राहुल देव पांडे और दिलीप साव यदि किसी अन्य मामले में अभियुक्त नहीं हैं, तो उन्हें रिहा किया जाए. निचली अदालत ने इन सभी को दोषी करार दिया था, जिसके खिलाफ सभी ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी. अपीलकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता हेमंत शिकरवार ने बहस की, वहीं राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता वंदना भारती ने पक्ष रखा.
दिनदहाड़े कोर्ट परिसर में AK-47 से हमला
दरअसल जून 2015 में हजारीबाग कोर्ट परिसर में दिनदहाड़े पेशी के लिए आए सुशील श्रीवास्तव, उनके सहयोगी कमाल खान और ग्यास खान की हत्या भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच AK-47 से कर दी गई थी. सुशील श्रीवास्तव की हत्या में AK-47 हथियार का इस्तेमाल किया गया था. झारखंड में अपराधियों द्वारा इस तरह के अत्याधुनिक हथियार के इस्तेमाल की यह पहली बड़ी घटना मानी गई. इस हमले में मो. कलाम और ग्यास खान की भी मौत हो गई थी.
सुरक्षा में तैनात 19 पुलिसकर्मी निलंबित
घटना के बाद सुशील श्रीवास्तव की सुरक्षा में तैनात 19 पुलिसकर्मियों को तत्काल निलंबित कर दिया गया था. इस हत्याकांड के बाद सदर थाने में कांड संख्या 610/15 दर्ज किया गया. मामले की जांच के क्रम में पुलिस ने 1 अगस्त 2015 को दिल्ली से विकास तिवारी को गिरफ्तार किया था. आगे की जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद यह मामला निचली अदालत से होते हुए हाईकोर्ट पहुंचा, जहां अब सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया है.

