गिरिडीह: जमुआ प्रखंड में सोमवार की शाम अचानक हुई तेज बारिश और ओलावृष्टि ने जहां एक ओर लोगों को खुश कर दिया, तो वहीं दूसरी ओर छोटे किसानों के लिए भारी मुसीबत भी खड़ी कर दी. शाम करीब 5 बजे से लगभग आधे घंटे तक हुई तेज बारिश और जमकर गिरे ओलों से पूरा जमुआ बाजार और आसपास का इलाका बर्फ की चादर से ढक गया.
सब्जी एवं साग की फसल पूरी तरह से बर्बाद
बताया जा रहा है कि इस तरह की ओलावृष्टि का नजारा करीब दो दशक पहले देखने को मिला था. अचानक मौसम बदलने से लोग जहां-तहां छुपने को मजबूर हो गए. ओलावृष्टि थमने के बाद कई लोग खेतों और बगीचों में गिरे आम के टिकोले चुनते नजर आए. हालांकि, इस प्राकृतिक घटना ने किसानों की कमर तोड़ दी है. खासकर छोटे और सीमांत किसानों द्वारा लगाई गई सब्जी एवं साग की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है. खेतों में लगी फसल ओलों की मार से नष्ट हो गई, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा.
सर्वे कराकर मुआवजा देने की मांग
स्थानीय किसानों का कहना है कि इस नुकसान की भरपाई उनके लिए आसान नहीं है. ऐसे में कृषि विभाग और जिला प्रशासन को आगे आकर प्रभावित किसानों की सहायता करनी चाहिए. किसानों ने फसल क्षति का सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने की मांग की है. वहीं, भाकपा माले ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए छोटे किसानों से अपील की है, कि वे अपनी फसलों के नुकसान का आवेदन जिला प्रशासन को दें, ताकि उन्हें सरकारी सहायता मिल सके. पार्टी ने प्रशासन से जल्द सर्वे कराकर मुआवजा देने की मांग की है. इस घटना के बाद क्षेत्र में किसानों के बीच चिंता का माहौल है और वे प्रशासन से राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं.
