15 मई से झारखंड में गूंजेगा भीम संदेश, आदिवासियों और दलितों की एकजुटता का नया शंखनाद

रांची: झारखंड में आदिवासियों और दलितों के हक-अधिकार की रक्षा और बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के...

Bhima message
दलित अधिकार मंच

रांची: झारखंड में आदिवासियों और दलितों के हक-अधिकार की रक्षा और बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए एक बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर ली गई है. दलित अधिकार मंच और आदिवासी महासभा ने संयुक्त रूप से भीम संदेश यात्रा निकालने का निर्णय लिया है. यह यात्रा न केवल सामाजिक एकजुटता का प्रतीक बनेगी, बल्कि राज्य में जल-जंगल-जमीन की अधूरी लड़ाई को भी नई धार देगी.

क्या है यात्रा का शेड्यूल?

भीम संदेश यात्रा की शुरुआत 15 मई को रांची हाई कोर्ट स्थित बाबा साहेब की प्रतिमा और भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ होगी. इसका समापन 30 जून को हूल दिवस के अवसर पर हजारीबाग में एक विशाल जनसभा के साथ किया जाएगा. यात्रा का उद्देश्य राज्य में दलितों (14 फीसदी ) और आदिवासियों (27 फीसदी ) की बड़ी आबादी होने के बावजूद उनके शोषण और जमीन की लूट के खिलाफ आवाज उठाना. साथ ही, बाबा साहेब के संविधान की रक्षा के लिए लोगों को जागरूक करना.

कांग्रेस और भाजपा पर निशाना

दलित अधिकार मंच के अध्यक्ष जैनेंद्र कुमार ने कांग्रेस और भाजपा दोनों पर निशाना साधा. उन्होंने राहुल गांधी द्वारा संविधान की कॉपी लेकर चलने को राजनीतिक दिखावा बताया, वहीं भाजपा पर सांप्रदायिक एजेंडा थोपने और आदिवासियों के हक छीनने का आरोप लगाया.  आदिवासी महासभा के राष्ट्रीय महासचिव पशुपति कोल ने कहा कि राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री आदिवासी होने के बाद भी आदिवासियों पर जुल्म जारी है. इस यात्रा के जरिए पूरे राज्य के गांवों में दौरा कर लोगों को एकजुट किया जाएगा. यात्रा से पहले 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती के अवसर पर सभी जिला और प्रखंड मुख्यालयों में धूमधाम से समारोह आयोजित किए जाएंगे.

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