Ranchi: झारखंड की प्रशासनिक मशीनरी को रफ्तार देने वाले आईएएस अधिकारियों की सुख-सुविधाओं और उनके प्रोटोकॉल को लेकर अक्सर चर्चा होती रहती है. राज्य सरकार ने इन अधिकारियों की कार्यकुशलता और फील्ड विजिट को ध्यान में रखते हुए गाड़ियों का एक व्यवस्थित कोटा तय किया है. मुख्य सचिव से लेकर जिले के एसडीओ तक, रैंक के हिसाब से गाड़ियों की संख्या और उन पर होने वाले मासिक खर्च का पूरा लेखा-जोखा सरकार के पास होता है. वर्तमान में कार्यरत 177 अधिकारियों के लिए सीधे तौर पर लगभग 180-190 वाहन विशेष रूप से आवंटित हैं. इसमें जिलों में तैनात डीसी और डीडीसी के फील्ड वाहन भी शामिल हैं.
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ऐसा है वाहनों पर प्रतिमाह होने वाला खर्च का गणित
झारखंड बजट 2026-27 के दस्तावेजों और विभाग-वार आवंटन के अनुसार, वाहनों पर होने वाले खर्च का एक बड़ा हिस्सा ईंधन और मरम्मत में जाता है. एक सरकारी वाहन पर ईंधन, ड्राइवर के भत्ते और रख-रखाव को मिलाकर औसतन 50,000 से 70,000 प्रति माह खर्च होता है. कार्यरत आइएएस अधिकारियों को पद और प्रोटोकॉल के अनुसार वाहन आवंटित किए जाते हैं. झारखंड सरकार के नियमों के अनुसार, पद के आधार पर 200 से 300 लीटर प्रति माह तक का तेल कोटा निर्धारित है. वर्तमान कीमतों के हिसाब से केवल तेल पर ही 20,000 से 30,000 खर्च होते हैं.
लग्जरी एसयूवी से लेकर मजबूत फील्ड व्हीकल तक का बेड़ा
वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, झारखंड कैडर के अधिकारियों के लिए लग्जरी एसयूवी से लेकर मजबूत फील्ड व्हीकल तक का बेड़ा तैयार रहता है. ये आंकड़े समय-समय पर होने वाले तबादलों, सेवानिवृत्ति और नए बजट आवंटन के आधार पर परिवर्तनीय हैं. राज्य सरकार अब धीरे-धीरे पुराने वाहनों को हटाकर इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की दिशा में भी बढ़ रही है, जिससे भविष्य में इस परिचालन खर्च में कमी आने की उम्मीद है.

विशेष परिस्थिति में विशेष सुरक्षा वाहन
मुख्य सचिव, विकास आयुक्त और महत्वपूर्ण विभागों के सचिवों के पास आवश्यकतानुसार बैकअप वाहन या विशेष सुरक्षा वाहन भी होते हैं. कार्यरत 177 अधिकारियों के लिए सीधे तौर पर लगभग 180-190 वाहन विशेष रूप से आवंटित हैं. इसमें जिलों में तैनात डीसी और डीडीसी के फील्ड वाहन भी शामिल हैं. राज्य के सभी कार्यरत आइएएस अधिकारियों के वाहनों के उपयोग पर हर महीने अनुमानित 1.2 करोड़ से 1.5 करोड़ का खर्च आता है.
किस रैंक के अधिकारी को मिलती है कितनी गाड़ियां
• मुख्य सचिवः राज्य के सर्वोच्च पद पर आसीन अधिकारी को आमतौर पर 2 से 3 गाड़ियां उपलब्ध कराई जाती हैं. इसमें एक आधिकारिक स्टाफ कार और एक एस्कॉर्ट वाहन शामिल होता है.
• अपर मुख्य सचिव व प्रधान सचिव : इन रैंक के अधिकारियों को 1 मुख्य लग्जरी गाड़ी और आवश्यकतानुसार विभाग के पुल से अतिरिक्त वाहन की सुविधा मिलती है.
• प्रमंडलीय आयुक्त और उपायुक्त : फील्ड पोस्टिंग वाले इन अधिकारियों के पास 2 गाड़ियां होती हैं. एक आधिकारिक प्रोटोकॉल के लिए और दूसरी फील्ड सर्वे या आपातकालीन स्थिति के लिए. इसके साथ ही इनके साथ सुरक्षा के लिए पायलट वाहन भी चलता है
• एसडीएम व एसडीओ : शुरुआती रैंक के अधिकारियों को फील्ड वर्क के लिए 1 मजबूत गाड़ी (जैसे बोलेरो या स्कॉर्पियो) आवंटित की जाती है.

हायर भी की गई हैं गाड़ियां
हाल के वर्षों में झारखंड सरकार ने नई गाड़ियां खरीदने के बजाय निजी एजेंसियों से गाड़ियां किराये पर लेने का चलन बढ़ाया है. एक लग्जरी गाड़ी का मासिक किराया 40,000 से 60,000 के बीच ड्राइवर सहित होता है.
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इलेक्ट्रिक वाहन की ओर कदम
झारखंड की नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति 2022 और उसके 2026 के अपडेट्स के तहत, अब सरकार धीरे-धीरे डीजल गाड़ियों को हटाकर आईएएस अधिकारियों के बेड़े में ई-कार शामिल कर रही है. रांची मुख्यालय में तैनात कई सचिव स्तर के अधिकारी अब इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग कर रहे हैं, जिससे मासिक परिचालन खर्च में 60 फीसदी तक की कमी आई है.
