Ranchi: रिम्स-2 परियोजना को लेकर रांची के नगड़ी क्षेत्र में विरोध तेज होने लगा है. पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने राज्य सरकार पर आदिवासियों और मूलवासियों की अनदेखी करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि नगड़ी की जमीन और वहां के लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए अब गांव-गांव में जनजागरण अभियान चलाया जाएगा. चंपाई सोरेन ने कहा कि रविवार से हर गांव में डुगडुगी बजाकर लोगों को एकजुट किया जाएगा. आंदोलन को मजबूत करने के लिए प्रत्येक परिवार से एक मुट्ठी चावल और दस रुपये का सहयोग भी लिया जाएगा. उन्होंने दावा किया कि आने वाले दिनों में नगड़ी में बड़ी संख्या में आदिवासी और मूलवासी जुटकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे.

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भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को लेकर लोगों के मन में कई सवाल
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने स्थानीय ग्रामीणों से बातचीत किए बिना रिम्स-2 परियोजना का काम शुरू कर दिया. उनका कहना था कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को लेकर लोगों के मन में कई सवाल हैं, लेकिन सरकार स्पष्ट जानकारी देने से बच रही है. ग्रामीणों को अपनी जमीन और भविष्य को लेकर चिंता सता रही है. पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड गठन के बाद भी आदिवासियों और मूलवासियों के विस्थापन की समस्या समाप्त नहीं हुई है. विकास परियोजनाओं के नाम पर कई गांव प्रभावित हुए, लेकिन प्रभावित परिवारों को न्याय नहीं मिल पाया. उन्होंने एचईसी का उदाहरण देते हुए कहा कि बड़ी संख्या में लोग अपनी जमीन और आजीविका से वंचित हुए.
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सरकार आदिवासी समाज की भावनाओं को नजरअंदाज कर रही
चंपाई सोरेन ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार आदिवासी समाज की भावनाओं को नजरअंदाज कर रही है. जरूरत पड़ी तो प्रभावित परिवार न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाएंगे. साथ ही उन्होंने कहा कि जन आंदोलन ही लोगों के अधिकारों की रक्षा का सबसे प्रभावी माध्यम है. उन्होंने भूमि अधिग्रहण कानून का उल्लेख करते हुए सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की. उनका कहना था कि लोगों को यह बताया जाना चाहिए कि अधिग्रहण की प्रक्रिया क्या है और इससे स्थानीय राजस्व गांवों तथा ग्रामीणों के अधिकारों पर क्या असर पड़ेगा.
