चांडिल: तेंतलो स्थायी पौधशाला की बदहाली, लापरवाही से घटा पौध उत्पादन

सरायकेला: चांडिल वन क्षेत्र के अधीन वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की स्थायी पौधशाला तेंतलो की स्थापना मार्च 2001 में की...

सरायकेला: चांडिल वन क्षेत्र के अधीन वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की स्थायी पौधशाला तेंतलो की स्थापना मार्च 2001 में की गई थी. तत्कालीन रेंजर एके सिंह और डीएफओ संपत कुमार ने संयुक्त रूप से विभिन्न प्रजातियों के पौधों की नर्सरी का उद्घाटन किया था. उस समय चांडिल रेंज में कोई नर्सरी नहीं थी. इसका मुख्य उद्देश्य वन क्षेत्र में पौधरोपण करना और आम नागरिकों को पौधे लगाने के लिए प्रेरित करना था.

नर्सरी में पौध तैयार करने की प्रक्रिया और उपयोग

तेंतलो नर्सरी में पहले बीजों को ट्रीटमेंट के बाद ट्यूब में डालकर मई में रोपा जाता था. पौधा तैयार होने में करीब तीन महीने लगते थे. जून, जुलाई और अगस्त में पौधे रोपण के लिए तैयार हो जाते थे. वन विभाग इन्हें विभिन्न वन क्षेत्रों में रोपण के लिए भेजता था. साथ ही रूटशूट कटिंग कर ट्यूब या फील्ड में भी लगाया जाता था.

एक हेक्टेयर में फैली इस नर्सरी में साल, गम्हार, महोगनी, कटहल, अमरूद, आम, बाँस, आँवला, जामुन, रिएंट्री, जाकुंडीह, सिरीस, वोकेन, प्लेटफॉर्न समेत करीब एक लाख विभिन्न प्रकार के पौधे तैयार किए जाते थे.

लापरवाही से उत्पादन में गिरावट, मूल उद्देश्य प्रभावित

हालाँकि, विभागीय लापरवाही के कारण आज हालात पहले जैसे नहीं रहे. उत्पादन और रखरखाव दोनों में गिरावट आई है, जिससे नर्सरी का मूल उद्देश्य प्रभावित हो रहा है.

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