सीजफायर के बाद बातचीत : पीयूष गोयल ने प्रमुख खाड़ी देशों के साथ की वर्चुअल बैठक, आपूर्ति श्रृंखला को पटरी पर लाने की कोशिश

Talks after the ceasefire: केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को खाड़ी क्षेत्र के प्रमुख देशों के साथ उच्च...

Talks after the ceasefire: केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को खाड़ी क्षेत्र के प्रमुख देशों के साथ उच्च स्तरीय वर्चुअल बैठकें की. इस बातचीत का मुख्य केंद्र हाल ही में हुए सीजफायर के बाद आपूर्ति श्रृंखला को फिर से पटरी पर लाना है. खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के महासचिव जसीम मोहम्मद अल बुदैवी के साथ बातचीत के दौरान पीयूष गोयल ने क्षेत्र में शांति बहाली पर खुशी जताई. उन्होंने उम्मीद जताई कि यह सीजफायर स्थायी शांति और स्थिरता का रास्ता साफ करेगा. गोयल ने कहा कि मतभेदों को सुलझाने के लिए ‘संवाद’ ही एकमात्र सही रास्ता है. भारत और जीसीसी देशों के बीच सदियों पुराने संबंध हैं. उन्होंने कहा कि हमारे लोगों के बीच का आपसी जुड़ाव ही हमारे आर्थिक रिश्तों की मजबूती का आधार है.

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खाड़ी देशों को खाद्य वस्तुओं की आपूर्ति करता रहेगा : पीयूष गोयल

बैठक में आपूर्ति और खाद्य सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा हुई. पीयूष गोयल ने आश्वासन दिया कि भारत किसी भी तरह की व्यापारिक बाधा को दूर करने के लिए पूरी तरह तैयार है और खाड़ी देशों को आवश्यक खाद्य वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करेगा. उन्होंने जीसीसी देशों की ओर से रसद जाल यानी कि ‘लॉजिस्टिक्स नेटवर्क’ को मजबूत करने और वैकल्पिक व्यापारिक मार्ग तलाशने के प्रयासों की भी सराहना की.

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भारतीय प्रवासियों की मदद के लिए यूएई नेतृत्व का गोयल ने जताया आभार

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के साथ बातचीत में भारत ने हाल के हमलों की कड़ी निंदा की. पीयूष गोयल ने कहा कि व्यापार के निरंतर प्रवाह से ही दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध मजबूत रहेंगे. उन्होंने संकट के समय भारतीय प्रवासियों की मदद के लिए यूएई नेतृत्व का आभार भी व्यक्त किया. वहीं बहरीन के साथ हुई चर्चा में समुद्री रास्तों की सुरक्षा और स्थिरता पर जोर दिया गया. पीयूष गोयल ने कहा कि समुद्री सुरक्षा और बुनियादी ढांचे पर होने वाले हमले किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं हैं. भारत पूरी मजबूती के साथ बहरीन और क्षेत्र की सुरक्षा के पक्ष में खड़ा है. खाड़ी देश भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं. युद्ध जैसे हालातों के बाद अक्सर आपूर्ति श्रृंखला टूटने का खतरा रहता है, जिससे महंगाई और सामानों की किल्लत बढ़ सकती है.

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