Ranchi: झारखंड पुलिस के महकमे में ट्रेजरी (कोषगार) से करोड़ों रुपए की अवैध निकासी फिलहाल पूरे राज्य में चर्चा का विषय बना हुआ है. जिस विभाग पर कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी है, उसी के नाक के नीचे भ्रष्टाचार का यह खेल वर्षों से चल रहा था. अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या चंद सिपाही इतनी बड़ी व्यवस्था को धता बताकर करोड़ों डकार सकते हैं? या फिर यह चारा घोटाले जैसी किसी बड़ी साजिश की आहट है?
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सिपाही का महल और इंटेलिजेंस की नाकामी
हैरानी की बात यह है कि इस घोटाले का मुख्य आरोपी मामूली सिपाही बताया जा रहा है. क्या यह वाकई इंटेलिजेंस की विफलता है या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गई थीं? सरकारी नियमों के अनुसार, किसी भी विभाग से एक रुपया भी बिना निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी (डीडीओ) के हस्ताक्षर के नहीं निकल सकता.
ट्रेजरी को भेजे जाने वाले हर बिल, वाउचर और चेक पर डीडीओ के अंतिम हस्ताक्षर अनिवार्य होते हैं. ऐसे में यह गले नहीं उतरता कि लाखों-करोड़ों की हेराफेरी होती रही और तीक्ष्ण नजर वाले इन अधिकारियों को कुछ पता नहीं चला.
