विनीत आभा उपाध्याय
Ranchi: झारखंड के बहुचर्चित शराब घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने विशेष अदालत के समक्ष बेहद चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. जेल में बंद आरोपी नवीन केडिया की जमानत याचिका का कड़ा विरोध करते हुए ACB ने बताया कि राज्य में शराब सिंडिकेट के जरिए सरकारी राजस्व को भारी चूना लगाया गया और इसके बदले आला अधिकारियों व रसूखदारों की जेबें भरी गईं.
सिंडिकेट के जरिए सुनियोजित साजिश का आरोप
ACB की जांच में यह तथ्य सामने आया है कि आरोपी नवीन केडिया और उनकी संबद्ध मैन पावर सप्लायर कंपनियां दिशिता वेंचर एवं ओम साईं बेवरेज लिमिटेड एक सुनियोजित साजिश के तहत काम कर रही थीं. इन कंपनियों ने शराब का स्टॉक केवल उन्हीं चुनिंदा कंपनियों से लिया, जिनसे उन्हें पहले से तय मोटा कमीशन मिलता था. यह पूरी प्रक्रिया सरकारी नियमों को ताक पर रखकर संचालित की जा रही थी.
कंपटीशन खत्म कर चुनिंदा सप्लायर्स को फायदा
इसका मुख्य कारण कंपटीशन को खत्म करना और केवल उन सप्लायर्स को लाभ पहुंचाना था, जो अवैध कमीशन के सिंडिकेट का हिस्सा थे. जांच एजेंसी ने कोर्ट को बताया कि देशी शराब के अवैध खेल में कमीशन की दरें भी तय थीं.
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प्रति पेटी तय था कमीशन का खेल
देशी शराब की प्रति पेटी पर 300 रुपये से लेकर 600 रुपये तक कमीशन वसूला जाता था. यह अवैध राशि केवल बिचौलियों तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसका एक बड़ा हिस्सा उत्पाद विभाग में शीर्ष पर बैठे लोगों तक पहुंचता था.
बड़े अधिकारियों के नाम आए सामने
जांच के दौरान कई आरोपियों ने तत्कालीन सचिव विनय चौबे और छत्तीसगढ़ के विवादित अधिकारी अरुण पति त्रिपाठी का नाम लिया है. प्रति पेटी वसूला गया यह कमीशन इन्हीं प्रभावशाली व्यक्तियों को रिश्वत के तौर पर दिया जाता था.
जमानत का विरोध, साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका
नवीन केडिया की जमानत का विरोध करते हुए ACB के विशेष लोक अभियोजक ने तर्क दिया कि आरोपी इस पूरे घोटाले का एक मुख्य मोहरा है. अगर जांच के इस स्तर पर उसे जमानत दी जाती है, तो वह साक्ष्यों को प्रभावित कर सकता है और जांच की दिशा को बाधित कर सकता है.
