रांची: झारखंड के विभिन्न जिलों में ट्रेजरी (कोषागार) से वेतन के नाम पर हुए बड़े फर्जीवाड़े के खिलाफ राज्य सरकार ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है. जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रविवार को इस पूरे प्रकरण की सीआईडी जांच के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है. इस फैसले के बाद अब राज्य के सरकारी खजाने में सेंध लगाने वाले गिरोह और इसमें शामिल अधिकारियों पर शिकंजा कसना तय माना जा रहा है.
एसआईटी का होगा गठन:
जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री कार्यालय से निर्देश प्राप्त होते ही सीआईडी मुख्यालय ने अपनी तैयारी तेज कर दी है. उम्मीद जताई जा रही है कि सोमवार को विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन की अधिसूचना जारी कर दी जाएगी. यह एसआईटी किसी सीनियर अधिकारी के नेतृत्व में काम करेगी और जिलों में जाकर फाइलों की बारीकी से पड़ताल करेगी. सीआईडी यह पता लगाएगी कि ट्रेजरी से पैसे निकालने के लिए किन-किन स्तरों पर मिलीभगत की गई.
सेवानिवृत्त अधिकारियों के नाम पर खेल:
शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि रिटायर हो चुके अधिकारियों के नाम पर फर्जी तरीके से वेतन की निकासी की जा रही थी. फिलहाल बोकारो और हजारीबाग में अवैध निकासी की पुष्टि हुई है, लेकिन आशंका है कि यह खेल पूरे राज्य में फैला हुआ है. जांच के दौरान सभी 24 जिलों के रिकॉर्ड खंगाले जा सकते हैं.
प्रशासनिक चूक की भी होगी अलग से जांच:
सिर्फ आपराधिक जांच ही नहीं, बल्कि इस पूरे मामले में सिस्टम की विफलता और चूक को लेकर भी सरकार गंभीर है.
IAS अधिकारी करेंगे जांच:
सूत्रों के मुताबिक, मुख्य सचिव के स्तर से एक आदेश जारी हो सकता है, जिसमें किसी वरीय आईएएस अधिकारी को प्रशासनिक जांच की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी. राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने ही इस मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री से उच्च स्तरीय जांच की अनुशंसा की थी.
कैसे खुला मामला?
हजारीबाग और बोकारो में ऑडिट और आंतरिक जांच के दौरान कुछ ऐसे ट्रांजैक्शन मिले, जो नियमों के विरुद्ध थे. कई ऐसे अधिकारियों के खातों में वेतन भेजा जा रहा था जो सेवा में नहीं थे. हालांकि, कई जिलों ने अभी तक अपनी रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि नहीं की है, लेकिन सीआईडी की एंट्री के बाद अब सभी जिलों के ट्रेजरी अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है.
