Lohardaga: झारखंड के लोहरदगा जिले का देश-विदेश में अपनी सांस्कृतिक पहचान के साथ एक खास रिश्ता भी रहा है, जो जुड़ता है सुरों की दुनिया की महान गायिका आशा भोसले से. प्रसिद्ध साहू परिवार के साथ उनके आत्मीय संबंधों के कारण लोहरदगा के लोगों के दिलों में उनके प्रति विशेष लगाव रहा है.
1991-92 का ऐतिहासिक ‘आशा भोसले नाइट’
धीरज प्रसाद साहू के अनुसार, वर्ष 1991-92 के दौरान रोटरी क्लब द्वारा आयोजित ‘आशा भोसले नाइट’ कार्यक्रम लोहरदगा और रांची के सांस्कृतिक इतिहास का एक यादगार अध्याय रहा. इस कार्यक्रम के सिलसिले में आशा भोसले अपनी बेटी के साथ रांची पहुंची थीं और तीन दिनों तक साहू परिवार के निवास ‘सुशीला निकेतन’ में ठहरी थीं.
सादगी और मिलनसारिता की मिसाल
उस दौरान उनके सरल और मिलनसार स्वभाव ने सभी का दिल जीत लिया था. घर के बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर किसी के साथ वे सहजता से घुल-मिल जाती थीं और हंसी-मजाक में समय बिताती थीं.
मोराबादी मैदान में सजी थी संगीत की महफिल
बताया जाता है कि उस समय रोटरी क्लब के बिहार प्रदेश अध्यक्ष गोपाल साहू के सौजन्य से यह भव्य आयोजन संभव हो पाया था. रांची के मोराबादी मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम में देश के कई नामचीन कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति दी थी. इनमें सुदेश भोसले, कुमार शानू और संगीता बिजलानी जैसे चर्चित नाम शामिल थे.
व्यक्तित्व ने छोड़ी अमिट छाप
धीरज प्रसाद साहू ने बताया कि आशा भोसले का व्यक्तित्व उनकी कला से कहीं अधिक प्रभावशाली था. वे जहां भी जाती थीं, अपने हंसमुख और जिंदादिल स्वभाव से माहौल को खुशनुमा बना देती थीं। बच्चों के साथ उनका खास लगाव था और वे उनसे मजाकिया अंदाज में बातें कर उन्हें हंसाती रहती थीं.
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मुलाकातों में झलकता अपनापन
उन्होंने यह भी बताया कि कार्यक्रम के बाद भी कई बार मुंबई में उनकी मुलाकात आशा भोसले से हुई. हर मुलाकात में उनका वही आत्मीय व्यवहार देखने को मिला, जिसने पहली बार में ही सभी को अपना बना लिया था.
लोहरदगा के लिए गर्व की बात
लोहरदगा के लोगों के लिए यह गर्व की बात रही है कि इतनी बड़ी कलाकार का उनके शहर और परिवार से इतना गहरा जुड़ाव रहा. आज भी जब उस दौर की बातें होती हैं, तो आशा भोसले की मधुर आवाज के साथ-साथ उनकी मुस्कान और सादगी भरा व्यक्तित्व लोगों के जेहन में ताजा हो उठता है.उनके साथ बिताए गए वे पल आज भी लोहरदगावासियों के लिए अनमोल धरोहर बने हुए हैं.
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