GUMLA: घाघरा थाना क्षेत्र के देवाकी गांव में आदिवासी किसानों के साथ ठगी का बड़ा मामला सामने आया है. 14 जनवरी 2026 को पशु तस्करों ने आठ किसानों को झांसे में लेकर उनके 19 मवेशी (गाय-बैल) ले लिए और फरार हो गए. तस्करों ने दो दिन में पैसे देने का वादा किया था, लेकिन अब तक न पैसे मिले और न ही मवेशी वापस लौटे.
ठंड से गर्मी तक न्याय की तलाश
पीड़ित किसान जनवरी की कड़ाके की ठंड से लेकर अप्रैल की भीषण गर्मी तक लगातार तस्करों की तलाश में भटकते रहे. खुद ही सुराग जुटाते हुए वे सिसई से लेकर लोहरदगा के तिगरा गांव तक पहुंचे, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ बहाने और झूठ ही मिले. तस्कर ने अपना नाम सलमान बताया और गलत पता देकर किसानों को गुमराह करता रहा.
पंचायत समिति सदस्य विजय उरांव की मदद से किसानों ने करीब डेढ़ महीने पहले घाघरा थाना में लिखित शिकायत दी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. इससे किसानों का प्रशासन पर भरोसा कमजोर होता जा रहा है.
मदद के नाम पर पैसों की मांग
किसान एक स्थानीय नेता के पास भी मदद के लिए पहुंचे. आरोप है कि नेता ने कहा कि 20-25 हजार रुपये खर्च होंगे, तब काम होगा और पैसा वापस दिलाया जाएगा. यह सुनकर किसान और भी निराश हो गए.खेती का मौसम नजदीक है, लेकिन मवेशियों के बिना किसान खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं. हालात ऐसे हैं कि कई किसान अब मजबूरी में पलायन करने की सोच रहे हैं.
पुलिस पर उठे सवाल
किसानों का कहना है कि वे खुद तस्कर के घर तक पहुंच गए, लेकिन पुलिस अब तक आरोपी तक नहीं पहुंच पाई. डेढ़ महीने बाद भी FIR दर्ज नहीं होना पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है.
किसानों की भावुक अपील
पीड़ित किसानों का कहना है कि वे आदिवासी हैं और कम पढ़े-लिखे हैं. भरोसा करके मवेशी दे दिए, लेकिन अब उनकी पूरी पूंजी चली गई. उन्होंने प्रशासन से गुहार लगाई है कि या तो मवेशी वापस दिलाए जाएं या उनका पैसा दिलाया जाए.
मंत्री के क्षेत्र में ही न्याय का अभाव
यह मामला आदिवासी कल्याण मंत्री चमरा लिंडा के विधानसभा क्षेत्र का है. ऐसे में किसानों को न्याय नहीं मिलना कई गंभीर सवाल खड़े करता है. लोगों का कहना है कि जब मंत्री के क्षेत्र में ही यह स्थिति है, तो बाकी जगहों का क्या हाल होगा.
देवाकी गांव के आठ किसानों से कुल 19 मवेशी ठगे गए, जिनकी कीमत करीब 3 लाख रुपये से अधिक बताई जा रही है. इसमें सीता उरांव, जतरु उरांव, सतीश उरांव, घुडु उरांव, शंकर उरांव, राम उरांव, महेश बड़ा और बिमला देवी शामिल हैं.
थाना प्रभारी का बयान
थाना प्रभारी मोहन कुमार सिंह ने बताया कि किसानों ने आवेदन दिया था, लेकिन FIR दर्ज कराने में रुचि नहीं दिखाई. उन्होंने कहा कि आरोपी से बातचीत भी की गई थी, लेकिन अब तक पैसा नहीं मिला है, इसलिए आगे कार्रवाई की जाएगी.
