Akshay Kumar Jha
Ranchi: झारखंड में एक नया घोटाला सामने आया है. इस घोटाले का नाम ट्रेजरी घोटाला करार दिया गया. सबसे पहले हजारीबाग और बोकारो में इस घोटाले का खुलासा हुआ. उसके बाद झारखंड के पशुपालन विभाग में भी घोटाला सामने आया. पशुपालन विभाग में करीब तीन करोड रुपए के घोटाले की बात सामने आयी. मीडिया में खबर छपने के बाद झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इसे गंभीरता से लिया और पूरे मामले की जांच करने की अनुमति वित्त विभाग को दी. वित्त विभाग के प्रधान सचिव प्रशांत कुमार के आदेश से एक जांच समिति का गठन किया गया जो आठ सदस्यीय है.
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रांची में हुए घोटाले की जांच नहीं करेगी समिति
जिस जांच समिति का गठन सरकार के आदेश के बाद वित्त विभाग ने किया है, वह समिति सिर्फ बोकारो और हजारीबाग में हुए ट्रेजरी घोटाले की जांच करेगी. रांची में हुए पशुपालन विभाग के घोटाले की जांच यह समिति नहीं करेगी. पुख्ता जानकारी के मुताबिक जो समिति बनाई गई है, इसकी अध्यक्षता उत्पाद विभाग के सचिव अमिताभ कौशल कर रहे हैं. जारी आदेश में कहा गया है कि यह समिति सिर्फ हजारीबाग और बोकारो में हुए ट्रेजरी घोटाले की जांच करेगी, जो पुलिस विभाग से संबंधित है. पशुपालन विभाग में हुए घोटाले की जांच यह समिति नहीं करेगी. खबर लिखे जाने तक ऐसा कोई आदेश सरकार या वित्त विभाग की तरफ जारी नहीं किया गया है, जिससे यह साबित हो सके कि पशुपालन विभाग में हुए ट्रेजरी घोटाले की कोई जांच समिति करेगी.
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जानें कौन-कौन हैं जांच समिति में
वित्त विभाग की तरफ से जो जांच समिति बनायी गयी है, वो आठ सदस्यीय है. यह आठ सदस्यीय समिति की अध्यक्षता अमिताभ कौशल, प्रधान सचिव उत्पाद विभाग करेंगे. वहीं इस समिति में छह सदस्य और एक सदस्य सचिव शामिल हैं. सदस्यों में प्रधान महालेखाकार, झारखंड रांची. ज्योति कुमारी झा (उप सचिव वित्त विभाग). कपिल देव पंडित (अवर सचिव वित्त विभाग). नरेश झा (लेखा नियंत्रक अंकेक्षण निदेशालय, वित्त विभाग). उमेश प्रसाद सिंह (वरीय निदेशक आईटी) और सदस्य सचिव खिरोद सिंह मुंडा (प्रशाखा पदाधिकारी वित्त विभाग) शामिल हैं.
