HAZARIBAGH: शहर की बिगड़ती सफाई व्यवस्था को लेकर हजारीबाग नगर निगम एक बार फिर सवालों के घेरे में है. हजारीबाग महापौर अरविन्द कुमार राणा ने दो दिन पहले हजारीबाग उपायुक्त हेमंत सती के साथ औपचारिक मुलाकात में सह बैठक में यह साफ तौर पर स्वीकार किया गया कि शहर की सफाई व्यवस्था संतोषजनक नहीं है. शहर के कई इलाकों में फैली गंदगी न केवल प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करती है, बल्कि नगर निगम की कार्यशैली पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करती है.

निरीक्षण में खुली लापरवाही की पोल
मंगलवार को हजारीबाग महापौर अरविन्द कुमार राणा ने नगर निगम परिसर स्थित यार्ड के निरीक्षण में स्थिति और भी चिंताजनक पाई गई. करोड़ों रुपये की लागत से खरीदी गई आधुनिक सफाई मशीनें-जैसे स्वीपिंग मशीन, टॉयलेट टैंक सफाई वाहन, टिपर, जेसीबी और डंपर-लंबे समय से अनुपयोगी स्थिति में खड़ी हैं और धीरे-धीरे कबाड़ में तब्दील होती जा रही हैं. हैरानी की बात यह है कि इनमें से कई वाहन मामूली मरम्मत के बाद फिर से उपयोग में लाए जा सकते हैं, लेकिन उनकी देखरेख के लिए कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है.
नए वाहन भी पड़े बेकार
इतना ही नहीं, हाल ही में खरीदे गए नए ट्रैक्टर भी बिना चालक के यार्ड में खड़े-खड़े जंग खा रहे हैं. यह सवाल उठना लाजिमी है कि जब चालक की व्यवस्था ही नहीं थी, तो इनकी खरीद क्यों की गई? निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि तीन फॉगिंग मशीनों में से दो मामूली खराबी के कारण बंद पड़ी हैं, जिससे मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम पर भी असर पड़ रहा है. इसके अलावा कचरा उठाव के लिए खरीदे गए सैकड़ों डस्टबिन और फाइबर ट्रॉली भी अनुपयोगी स्थिति में पड़े हैं.

संसाधन मौजूद, फिर भी व्यवस्था ठप
इस पूरी स्थिति से यह स्पष्ट है कि नगर निगम के पास संसाधनों की कोई कमी नहीं है, बल्कि कमी है तो इच्छाशक्ति, समन्वय और जवाबदेही की. पिछले एक दशक में सफाई कर्मियों (सफाई मित्रों) की नई नियुक्ति नहीं की गई है, जबकि शहर का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है. बताया जा रहा है कि सफाई कर्मियों के वेतन के लिए निर्धारित राशि का उपयोग भी अन्य कार्यों में किया गया, जिससे व्यवस्था और कमजोर हो गई.
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विशेषज्ञों की राय और आगे की कार्रवाई
हजारीबाग समाजसेवी और विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उपलब्ध संसाधनों का समुचित उपयोग किया जाए और नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए, तो हजारीबाग को स्वच्छ शहरों की सूची में शामिल किया जा सकता है. फिलहाल स्थिति यह है कि संसाधन होते हुए भी उनका लाभ आम जनता तक नहीं पहुंच पा रहा है.
जांच और कार्रवाई के संकेत
जिला प्रशासन ने अब इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए जवाबदेही तय करने के संकेत दिए हैं. अधिकारियों का कहना है कि सभी खर्चों की जांच की जाएगी और लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई की जाएगी. साथ ही, शहर की सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है.
