रांची: विधानसभा के बजट सत्र के छठे दिन सेकेंड हाफ में बजट पर चर्चा हुई. सत्ता पक्ष ने बजट को ऐतिहासिक बताया, जबकि विपक्ष ने इसे आंकड़ों की बाजीगरी करार दिया. विपक्ष का कहना था कि नए कलेवर में पुरानी चीजों को पेश किया गया है.

बजट के पक्ष में बोलते हुए अनंत प्रताप देव ने कहा कि बजट में किसानों के लिए किया गया प्रावधान ऐतिहासिक है. राजकोषीय घाटा तीन फीसदी से कम रखा गया है. देश में पहली बार झारखंड में सर्जन पेंशन योजना लागू की गई है. यह बजट गांव, गरीब और किसान का बजट है. यह समावेशी विकास का जीवंत दस्तावेज है. उन्होंने कहा कि डबल इंजन की सरकार का इंजन भ्रष्टाचार की पटरी पर दौड़ रहा था और झारखंड के साथ केंद्र सौतेला व्यवहार कर रहा है.
बजट में वित्तीय प्रबंधन की काफी कमी: राज सिन्हा
राज सिन्हा ने बजट की आलोचना करते हुए कहा कि इसमें वित्तीय प्रबंधन की काफी कमी दिखाई देती है. धनबाद में पेयजल की 900 करोड़ की योजना आज भी अधूरी है. प्रदूषण चरम पर है और पानी का घोर अभाव है. धनबाद की 38 सड़कें आज तक नहीं बनीं. नए कलेवर में पुरानी योजनाओं को पेश किया गया है. सरकार की सात गारंटी में से एक भी पूरी नहीं हुई. बजट में विजन की कमी है. प्रदूषण बोर्ड और वन विकास निगम में महत्वपूर्ण पद खाली हैं. राजस्व विभाग में करोड़ों का घोटाला हुआ है. वित्तीय प्रबंधन पर श्वेत पत्र लाया जाना चाहिए. जल, जंगल और जमीन की समस्याओं का निपटारा नहीं होने के कारण पूंजीपति राज्य में नहीं आ रहे.
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DMFT फंड में हुआ है घोटाला
राज सिन्हा ने कहा कि केंद्र से अनुदान के रूप में झारखंड को अब तक एक लाख चार हजार करोड़ रुपये मिले हैं. वर्ष 2025-26 में 11,570 करोड़ रुपये ब्याजमुक्त दिए गए हैं. डीएमएफटी फंड में घोटाला हुआ है. दो दशक से 10 हजार करोड़ रुपये का हिसाब नहीं मिल रहा. 15वें वित्त आयोग की राशि खर्च करने में राज्य विफल रहा है. बजट में बेरोजगारी भत्ते का जिक्र नहीं है.
इस पर मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि भाजपा फर्जी आंकड़ों की एक्सपर्ट है और जनता को गुमराह कर रही है. अब तक 15-15 लाख रुपये देने का वादा पूरा नहीं हुआ. राज सिन्हा ने जवाब में कहा कि दो साल में 1.5 लाख पद घटा दिए गए. विस्थापितों को जमीन तो दी गई, लेकिन जमीन का कागज नहीं दिया गया. उनका जाति प्रमाण पत्र भी नहीं बन रहा. यह विनाश की ओर ले जाने वाला बजट है.
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गांव समृद्ध होंगे, आधारभूत संरचना बढ़ेगी: डॉ. रामेश्वर उरांव
डॉ. रामेश्वर उरांव ने बजट का समर्थन करते हुए कहा कि इससे गांव समृद्ध होंगे और आधारभूत संरचना मजबूत होगी. पूंजीगत व्यय बढ़ाना बेहतर कदम है. एफआरबीएम का ध्यान रखा गया है. सोशल सेक्टर में आम लोगों को फायदा होगा. सरकार को राज्य के विकास की चिंता है. उत्पादन बढ़ेगा तो रोजगार भी बढ़ेगा. उन्होंने कहा कि राज्य में आर्थिक असमानता एक बड़ी चुनौती है. विभिन्न जिलों की आय में असमानता को कम करना होगा. बिना खर्च बढ़ाए योजनाएं पूरी नहीं होंगी. खर्च बढ़ेगा तो आमदनी भी बढ़ेगी. मनरेगा का नाम बदलने की जरूरत नहीं थी. बजट बेहतर और संतुलित है.
बजट की असली परीक्षा जमीन पर होगी: जयराम महतो
जयराम महतो ने कहा कि बजट की असली परीक्षा कागज पर नहीं, बल्कि जमीन पर होगी. बजट राज्य की अर्थव्यवस्था के विजन का दस्तावेज होना चाहिए. यदि मूल्य संवर्द्धन और रोजगार राज्य से बाहर जाएगा तो समृद्धि कैसे आएगी. कृषि को उद्योग से जोड़ना होगा. प्रति व्यक्ति आय राज्य की जीडीपी बढ़ने से बढ़ती है. सरकार को प्रोसेसिंग यूनिट पर ध्यान देना होगा. स्थानीय युवाओं को तकनीकी रूप से दक्ष बनाना जरूरी है. राज्य को मैन्युफैक्चरिंग पावर हाउस बनाने की आवश्यकता है.
सुरेश पासवान ने कहा कि विपक्ष गरीबों को देखना नहीं चाहता. यह गरीब, पिछड़े और अल्पसंख्यकों की सरकार है. बजट से विपक्ष की नींद हराम हो गई है.
सरयू राय ने कहा कि बजट के आंकड़ों के अनुसार राज्य प्रगति कर रहा है, लेकिन राशि का उपयोग क्यों नहीं हो रहा. 68 घोषणाओं में से सिर्फ आठ ही पूरी हुई हैं. ऐसे में प्रशासनिक प्रबंधन कैसे सफल होगा. कृषि और वन क्षेत्र में एआई का उपयोग किया जा सकता है. मेधावी लोगों की टास्क फोर्स बनाई जानी चाहिए. मैं मंइया सम्मान योजना का समर्थक हूं. इसका सर्वे कराकर देखना चाहिए कि इसका क्या लाभ हो रहा है.
निर्मल महतो ने कहा कि यह अबुआ नहीं, बबुआ बजट है. मांडू विधानसभा क्षेत्र की अनदेखी की गई है. सरकार बबुआ बनाने का काम कर रही है.
चंद्रदेव महतो ने कहा कि बजट यदि जमीन पर उतरे तो अच्छा काम होगा. महिला सशक्तिकरण की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं. ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलेगी. धनबाद में टेक्निकल यूनिवर्सिटी की स्थापना जल्द होनी चाहिए.

