वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर के वार से सियासी हलचल, झामुमो ने दी मर्यादा की नसीहत

Ranchi: झारखंड की सियासत में इन दिनों अपनों के बीच ही तलवारें खिंची हुई हैं. प्रदेश कांग्रेस कमेटी के गठन के बाद...

Ranchi: झारखंड की सियासत में इन दिनों अपनों के बीच ही तलवारें खिंची हुई हैं. प्रदेश कांग्रेस कमेटी के गठन के बाद से वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर का अपनी ही पार्टी के नेतृत्व और सरकार के खिलाफ बागी तेवर अपनाना अब गठबंधन के लिए गले की हड्डी बन गया है. मामला केवल आंतरिक कलह तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जेटेट नियमावली से भोजपुरी, मगही और अंगिका को हटाए जाने के मुद्दे ने सरकार की एकजुटता पर सवालिया निशान लगा दिया है.

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गठबंधन में बढ़ी तल्खी

वित्त मंत्री द्वारा सोशल मीडिया पर सरकार को कठघरे में खड़ा करने पर झामुमो ने कड़ी आपत्ति जताई है. झामुमो के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने दो टूक कहा कि कैबिनेट की बातें बाहर लाना अफसोसजनक है. उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि 2029 तक के जनादेश का सम्मान करते हुए वरिष्ठ नेताओं को मर्यादा में रहना चाहिए.

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कांग्रेस के अंदर भी वार-पलटवार

इस विवाद में कांग्रेस विधायक कुमार जयमंगल उर्फ अनूप सिंह भी कूद पड़े हैं. उन्होंने बिना नाम लिए वित्त मंत्री पर तंज कसते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि कांग्रेस में होना और कांग्रेसी होना दो अलग-अलग बातें हैं. स्पष्ट है कि भाषा विवाद के बहाने झारखंड में सत्ताधारी गठबंधन के भीतर शह और मात का खेल शुरू हो चुका है, जो आने वाले दिनों में और गहरा सकता है.

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