Chakradharpur: भारतीय जनता पार्टी के पूर्व जिला उपाध्यक्ष पवन शंकर पांडे ने पश्चिमी सिंहभूम जिले में बालू और चिप्स (गिट्टी) की भारी किल्लत पर गहरी चिंता व्यक्त की है. उन्होंने कहा कि जिले में बालू उपलब्ध न होने के कारण सभी छोटे-बड़े विकास कार्य पूरी तरह बाधित हो गए हैं, जिससे जनता में भारी रोष है.
विकास योजनाओं पर लगा ग्रहण
पवन शंकर पांडे ने बताया कि बालू की कमी के कारण प्रधानमंत्री आवास योजना, अबुआ आवास, पुल-पुलिया, चेक डैम और पीसीसी रोड जैसे महत्वपूर्ण निर्माण कार्य अधर में लटके हुए हैं. उन्होंने कहा, “बिना बालू के कोई भी निर्माण कार्य संभव नहीं है. सरकार की उदासीनता के कारण गरीब परिवारों के सिर पर छत बनने का सपना अधूरा रह गया है और जिले की बुनियादी ढांचा परियोजनाएं रुक गई हैं.”
सरकार की गंभीरता पर उठे सवाल
श्री पांडे ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्तमान सरकार इस गंभीर संकट पर संज्ञान लेने में पूरी तरह विफल रही है. अब तक बालू घाटों की निविदा (Tender) प्रकाशित नहीं होना सरकार की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़ा करता है. ऐसा प्रतीत होता है कि राज्य सरकार जनहित के मुद्दों को लेकर गंभीर नहीं है.
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मानसून और NGT की चुनौती
उन्होंने कहा कि अगले दो महीनों में मानसून दस्तक देने वाला है. इसके साथ ही 15 जून से नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के नियमों के तहत बालू खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लग जाएगा. यदि समय रहते निविदा प्रक्रिया पूरी कर स्टॉक सुनिश्चित नहीं किया गया, तो अगले कई महीनों तक जिले में विकास की गति प्रभावित हो सकती है.
प्रशासन से उठाई मांगें
पवन शंकर पांडे ने राज्य सरकार और जिले के वरीय पदाधिकारियों से मांग की है कि जिले में बालू और चिप्स की किल्लत दूर करने के लिए तत्काल पहल की जाए. बालू घाटों की निविदा प्रक्रिया शुरू की जाए और सरकारी योजनाओं को गति देने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा.
