FCI गोदाम : प्रति बोरी 9 की जगह 3 रूपये मिल रहा मजदूरों को, न्यूनतम मजदूरी दर का हो रहा उल्लंघन

Bokaro : बोकारो के रेलवे गुड्स शेड में एफसीआई गोदाम में काम में लगे मजदूरों को सरकार द्वारा तय मजदूरी दर नहीं...

Bokaro : बोकारो के रेलवे गुड्स शेड में एफसीआई गोदाम में काम में लगे मजदूरों को सरकार द्वारा तय मजदूरी दर नहीं मिल रही है. ये मजदूर गोदाम में लोडिंग अनलोडिंग करते है. जहां सरकार द्वारा तय प्रत्येक बोरी की ढुलाई पर 9.10 रुपए की जगह 3.30 रूपये ही ठेकेदार मजदूरों को दे रहे है.
एफसीआई गोदाम में डिमांड के अनुसार हर माह रेलवे रैक की संख्या बढ़ते घटते रहती है. किसी माह 29 तो किसी माह 56 रैक उपलब्ध होता है. सूत्रों के अनुसार प्रति बोरी के लिए 9.10 रुपए का भुगतान किया जाना है. लेकिन यहां मजदूरों को मात्र 3 रुपए 30 पैसे ही प्रति बोरी के हिसाब से भुगतान किया जाता है. वो भुगतान भी माह पूरा होने पर किया जाता है. मजदूरों की मानें तो अधिकारियों और ठेकेदारों के सांठ गांठ से मजदूरी दर कम दी जाती है.

जिला में है तीन गोदाम

बोकारो जिले में एफसीआई के तीन गोदाम है. इनमें से एक चास कृषि बाजार समिति, दूसरा काशीझरिया और तीसरा बहादुरपुर में स्थित है. रेलवे रैक में गुड्स शेड में पहुंचने वाली अनाज की बोरियों को अनलोड कर, उसे ट्रक में लोड किया जाता है. एक बोगी में करीब 1300 बोरियां होती है. जिसके लोडिंग अनलोडिंग में 8 से 10 मजदूर लगते है. मजदूरों को सही रेट मिले तो वे अपने परिवार का बेहतर ढंग से पालन पोषण कर सकते है.

केंद्र सरकार द्वारा तय न्यूनतम मजदूरी

जानकारों की मानें तो केंद्र सरकार की संशोधित न्यूनतम मजदूरी दर रेलवे माल गोदाम, वेयरहाउस, बंदरगाह और हवाई अड्डों के मजदूरों के लिए अलग अलग श्रेणियों में रखकर निर्धारित की गई हैं. मेट्रोे शहर के मजदूरों के लिए करीब 827 रुपए प्रतिदिन, अन्य शहर के मजदूरों के लिए करीब 693 रुपए प्रतिदिन और क्षेत्र ग्रामीण कस्बा क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों के लिए 556 रुपए प्रतिदिन का तय है. बोकारो में मजदूरों को कम से कम 693 रुपए प्रतिदिन मिलनी चाहिये.

वहीं, राज्य सरकार के अनुसार 20 किलो तक 4.30 रुपए प्रति बोरी, 20 से 40 किलो 6.20 रुपए प्रति बोरी, 41 से 65 किलो 9.10 रुपए प्रति बोरी, 66 से 85 किलो 12.40 रुपए प्रति बोरी एवं 86 से 100 किलो 15.10 रुपए प्रति बोरी तय है. लेकिन गुड शेड में मजदूरों को इन सरकारी दरों के हिसाब से भुगतान नहीं किया जाता.

अधिकारी करेंगे जांच

इस संबंध में जब एफसीआई अधिकारी और लेबर कमिश्नर से बात हुई तो दोनों ने कहा कि मजदूरों को निर्धारित न्यूनतम मजदूरी मिलनी चाहिए. लेबर कमिश्नर रंजीत कुमार ने मामले की जांच कर मजदूरों को उचित मजदूरी दिलाने की बात कही.

 

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