Hazaribagh: जिला के चुरचू प्रखंड के इंद्रा पंचायत के दाहूदाग गांव आजादी के इतने दशक बीतने के बावजूद भी आज भी विकास की किरणों से अछूता है.
चरही रेलवे स्टेशन से मात्र सात किलोमीटर दूरी पर स्थित है दाहूदाग गांव. चारों तरफ घने जंगल और पहाड़ों की तराइयों से घिरा हुआ है यह गांव. दाहूदाग गांव में आजतक किसी सरकारी आलाधिकारी का आगमन तक नहीं हुआ है. उक्त गांव जाने के लिए आज भी जंगली पगडंडी का सहारा लेना पड़ता है. गांव जाने के लिए फिलहाल कुछ दूरी तक पीसीसी पथ का निर्माण किया गया है लेकिन बस कुछ दूर तक ही है.

फिलहाल ग्रामीणों को आवागमन को लेकर काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. खासकर बरसात के दिनों में जंगली पगडंडी रास्ता भी काफी उबड़-खाबड़ हो जाता है. आजादी के इतने दशक बीतने के बावजूद भी आजतक झंडा टोंगरी से दाहूदाग गांव जाने के लिए पक्का सड़क नहीं बन पाया है. स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि सड़क निर्माण को लेकर स्थानीय ग्रामीणों के द्वारा विधायक, सांसद से लेकर जिला प्रशासन तक गुहार लगाई जा चुकी है लेकिन आज तक किसी भी जनप्रतिनिधि और न कोई सरकारी अधिकारी ने सुध ली है.
28 बच्चों के लिए सिर्फ एक शिक्षक
बताते चलें कि दाहूदाग गांव में नव प्राथमिक विद्यालय संचालित है जिसमें कुल 28 बच्चे नामांकित हैं लेकिन एक मात्र सहायक शिक्षक पदस्थापित हैं. सहायक शिक्षक रिजून महतो ने बताया कि विद्यालय के चारों तरफ घना जंगल होने के कारण बराबर भय बना रहता है. इस विद्यालय में अध्ययनरत छात्र-छात्रा सुरक्षित नहीं रहते हैं.
कई बार विद्यालय में चाहरदीवारी को लेकर लिखित शिकायत किया जा चुका है लेकिन आजतक कोई सुध नहीं ली है. भवन की घोर अभाव है, कुल चार भवन हैं जिसमें दो पुराना भवन काफी जर्जर अवस्था में रहने के कारण बच्चों को डर से नहीं बैठाते हैं.
चापानल खराब, नेटवर्क की भी समस्या
नव प्राथमिक विद्यालय दाहूदाग का अपना चापानल कई दिनों से खराब पड़ा हुआ है जिसके कारण बच्चों को पानी पीने से लेकर मध्याह्न भोजन बनाने तक में दिक्कत होती है.
दाहूदाग गांव में कई मूलभूत समस्याओं का घोर अभाव है. गांव में नेटवर्क बहुत कम पकड़ता है जिसके कारण लोग दूरभाष पर ठीक से अपने घर, परिवार या किसी रिश्तेदार से बातचीत नहीं कर पाते हैं. नेटवर्क नहीं रहने के कारण विद्यालय के सहायक शिक्षक अपना बायोमैट्रिक हाजिरी भी ठीक से नहीं लगा पाते हैं. इस समस्या को लेकर संबंधित विभाग के अधिकारियों को लिखित शिकायत तक दे दी गई है लेकिन बायोमैट्रिक हाजिरी नहीं बनने के कारण सहायक शिक्षक का सितम्बर माह का मानदेय भुगतान पर रोक लगा दी गई है.
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खौफ के साये में जी रहे ग्रामीण
दाहूदाग गांव के भुनेश्वर कुमार महतो, कैलाश महतो, विशेश्वर महतो, दीपक कुमार महतो, अर्जुन महतो, राजेंद्र महतो, परमेश्वर महतो, पिंटू कुमार, चमेली महतो, कामेश्वर कुमार महतो, हरी कुमारी, भारती देवी, सीमा देवी, मंजू देवी, गंगिया देवी, सरिता देवी, शांति देवी, मालको देवी, प्रदीप कुमार, झरीलाल महतो, देवचरण कुमार, संदीप कुमार महतो, सहदीप कुमार, गुरुदयाल महतो सहित कई महिला-पुरुष ने अपनी समस्याओं को बारीकी से बताया कि गांव में कई मूलभूत समस्या हैं लेकिन फिलहाल गांव की मुख्य समस्या सड़क है. अगर सड़क बना दी जाए तो लोगों को आवागमन में परेशानी नहीं होगी.
दाहूदाग गांव किसी खौफनाक जगह से कम नहीं है. यह गांव चारों तरफ घना जंगल और पहाड़ की तलहटी पर बसा हुआ है. गांव जाने से लोग आज भी कतराते हैं. गांव के बुजुर्ग कौलेश्वर महतो ने बताया कि आज से लगभग दस-बीस साल पहले जंगली जानवरों का बसेरा हुआ करता था यह गांव. कई बुजुर्गों का कहना है कि आंख के सामने से गाय, भैंस सहित बकरी को शिकार कर ले जाता था और हमलोग देखते रह जाते थे.
गांव के निवासी शिकारी महतो ने बताया कि आज भी हमलोग खौफ के साये में जीवन व्यतीत करने को मजबूर हैं. गांव में बिजली है लेकिन वह भी भगवान भरोसे है. कई दिनों तक बिजली गुल रहती है. इंद्रा पंचायत मुखिया राधिका देवी ने बताया कि जल्द ही खराब पड़े चापानल को दुरुस्त करवाया जाएगा.
