Deepak Sawal
Bokaro/Ranchi: पूर्व मंत्री एवं गोमिया के पूर्व विधायक माधवलाल सिंह का व्यक्तित्व केवल राजनीति तक सीमित नहीं था, बल्कि वे जनसेवा, ईमानदारी और मानवीय संवेदनाओं के प्रतीक माने जाते थे. चार दशक से अधिक लंबे राजनीतिक जीवन में उन्होंने जिस सादगी, निष्ठा और ईमानदारी के साथ राजनीति की, वह आज भी लोगों के बीच मिसाल के रूप में याद की जाती है. विधायक से लेकर अविभाजित बिहार और झारखंड सरकार में मंत्री पद तक पहुंचने के बावजूद उन पर कभी कोई दाग नहीं लगा. गरीबों, मजदूरों और जरूरतमंदों के प्रति उनका लगाव ही उन्हें अन्य नेताओं से अलग पहचान दिलाता था. माधवलाल सिंह देर रात तक क्षेत्र भ्रमण करने के लिए भी चर्चित रहे. वे आधी-आधी रात तक गांवों में पहुंचकर लोगों का हालचाल लेते थे और सुख-दुख में शामिल होते थे. कार्यकर्ताओं से उनका रिश्ता केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि आत्मीय था. कहा जाता है कि उन्हें अपने एक-एक कार्यकर्ता का नाम याद रहता था.
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जनसेवा के कई उदाहरण
राजनीति में जनसेवा की ऐसी मिसाल कम ही देखने को मिलती है. जनसेवा की भावना उनके अंतरात्मा में बसी हुई थी और इसके कई प्रमाण है. खासकर अपने विधानसभा क्षेत्र से बाहर जाकर भी कई मौकों पर इन्होंने इसका उदाहरण दिया है. वर्ष 2008 में चंदनकियारी प्रखंड के कुम्हरदग्गा गांव के तीन प्रवासी मजदूरों की हरियाणा की एक मिल में हुए भीषण ब्लास्ट में मौत हो गई थी. घटना की सूचना मिलते ही माधवलाल सिंह तुरंत गांव पहुंचे. उस समय प्रशासन का कोई अधिकारी वहां नहीं पहुंचा था. उन्होंने पीड़ित परिवारों को ढांढस बंधाया, आर्थिक सहायता दी और अधिकारियों से बात कर सरकारी मदद सुनिश्चित कराई. उनके हस्तक्षेप के बाद ही प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू हुई. इसी तरह वर्ष 2007 में चंदनकियारी के हराईकुरवा गांव के एक युवक की सावन में जल यात्रा के दौरान सड़क हादसे में मौत हो गई थी. घटना की जानकारी मिलते ही माधवलाल सिंह रात में ही गांव पहुंचे. उन्होंने न केवल परिवार को आर्थिक सहायता दी, बल्कि मृतक के गंभीर रूप से बीमार तीन वर्षीय पुत्र के इलाज की व्यवस्था भी तत्काल कराई. अगले दिन स्वयं अस्पताल पहुंचकर बच्चे और परिवार का हालचाल लिया. वर्ष 2003 में कसमार प्रखंड के टांगटोना और तेलियाडीह गांव में डायरिया फैलने से दर्जनों ग्रामीण बीमार पड़ गए थे. उस समय क्षेत्र में एंबुलेंस की सुविधा नहीं थी. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए माधवलाल सिंह ने अपनी सरकारी लालबत्ती लगी एम्बेसडर कार को ही मरीजों की सेवा में लगा दिया. देर रात तक अस्पताल में रहकर उन्होंने इलाज की व्यवस्था कराई और मरीजों का हौसला बढ़ाया.
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आमलोगों की सहायता के लिए रहते थे सदैव तत्पर
वहीं वर्ष 2007 में पेटरवार के श्यामलता गांव में वज्रपात से छह महिलाओं की मौत हो गई थी. घटना की सूचना मिलते ही उन्होंने तत्काल सहयोगियों को भेजकर शवों को अस्पताल पहुंचवाया, पोस्टमार्टम की व्यवस्था कराई और पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई. साथ ही प्रशासनिक अधिकारियों से बात कर मुआवजा दिलाने की पहल भी की. ऐसे अनेक प्रसंग आज भी लोगों की स्मृतियों में जीवित हैं. यही कारण है कि लोग माधवलाल सिंह को केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि दुख-सुख में साथ खड़े रहने वाले संवेदनशील और जनप्रिय नेता के रूप में याद करते हैं.
(झारखंड के जाने-माने वरिष्ठ पत्रकार, साथा ही बोकारो के एनसाइक्लोपीडिया कहे जाने वाले दीपक सवाल का यह लेख)
