Saraikela: चांडिल वन क्षेत्र के दारुदा और बुरुडीह जंगल में हाथियों का झुंड देखने को मिला, जिससे राहगीरों में दहशत देखी गई. वन विभाग द्वारा एलिफेंट ड्राइव टीम और QRT दस्ता लगाया गया, परन्तु हाथी को भगाने में टीम असमर्थ रही. हाथी न भगाए जा पाने से कुकड़ू प्रखंड के दर्जनों सुदूरवर्ती गांव के ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति नाराजगी देखी गई. ग्रामीणों का कहना है कि विभाग समय पर हाथियों की गतिविधि पर नजर नहीं रखता, जिससे चांडिल अनुमंडल क्षेत्र के सभी प्रखंडों में लोग परेशान हैं.
‘रेड जोन’ घोषित करने की मांग
ग्रामीणों ने मांग की है, कि हाथी बहुल क्षेत्रों वाले गांवों को ‘रेड जोन’ घोषित कर वहां हाथी के होर्डिंग-बैनर लगाए जाएं. उक्त गांवों को चिन्हित कर सूचना प्रणाली बनाई जाए, ताकि ग्रामीणों को समय पर जानकारी मिल सके और जान-माल का नुकसान न हो.

बंगाल मॉडल की चर्चा
लोगों ने पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले का उदाहरण दिया. अयोध्या पहाड़ में हाथी बहुल क्षेत्र है. बंगाल के वन एवं पर्यावरण विभाग द्वारा जब जंगल से हाथियों का झुंड भोजन-पानी की तलाश में गांव में उतरता है, तो विभाग की टीम प्रत्येक गांव में पहुंचकर माइकिंग कर चेतावनी देती है कि ‘आपके गांव के आसपास जंगली हाथियों का झुंड इसी रास्ते से जा रहा है.’
झारखंड में लचर व्यवस्था
ग्रामीणों का आरोप है कि इसके अपेक्षा झारखंड राज्य वन विभाग द्वारा समय पर हाथियों की गतिविधि पर नजर नहीं रखी जाती. न सूचना मिलती है, न त्वरित कार्रवाई. इसी कारण आए दिन फसल बर्बादी और जान-माल का खतरा बना रहता है.
वन विभाग ने कहा है कि टीम लगातार निगरानी कर रही है और जल्द हाथियों को अयोध्या पहाड़ जंगल की ओर खदेड़ा जाएगा. ग्रामीणों से अपील की गई है, कि अफवाहों पर ध्यान न दें और रात में अकेले जंगल की ओर न जाएं.
यह भी पढ़ें: भाजपा की चुनावी तेल नीति ने देश को आर्थिक गर्त में धकेला: झामुमो
