Saraikela: सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल प्रखंड में सामने आए 750 फर्जी जन्म प्रमाण पत्र घोटाले में अब पश्चिम बंगाल कनेक्शन भी उजागर हुआ है. जांच के दौरान ग्राम पंचायत रुचप से जारी एक संदिग्ध जन्म प्रमाण पत्र सामने आया है, जिसने प्रशासन और जांच एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है.
यह प्रमाण पत्र सुकुरमानी कर्मकार नामक लड़की के नाम से जारी किया गया है, जिसमें जन्मतिथि 20 अप्रैल 2010 दर्ज है. दस्तावेज में माता का नाम रीता कर्माकर बताया गया है. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि प्रमाण पत्र में माता-पिता का स्थायी पता पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले का दर्ज है.

प्रमाण पत्र में दर्ज पता
दस्तावेज के अनुसार स्थायी पता इस प्रकार लिखा गया है:
VILL-TUNTURI, PO-TUNTURI, PS-BAGMUNDI, DIST-PURULIA, WEST BENGAL-723212
इस खुलासे के बाद पूरे मामले में कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
जांच में सामने आई संदिग्ध बातें
क्षेत्राधिकार पर सवाल: जब परिवार का स्थायी पता पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले का है, तो झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले की रुचप पंचायत से जन्म प्रमाण पत्र कैसे जारी किया गया. यदि जन्म झारखंड में हुआ था, तो अस्पताल, स्वास्थ्य केंद्र या दाई का कोई विवरण दस्तावेज में क्यों नहीं है?
दस्तावेज के फॉर्मेट पर संदेह: प्रमाण पत्र में हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में एक जैसी जानकारी दोहराई गई है. सरकारी दस्तावेजों में इस तरह की त्रुटि आमतौर पर संदेह पैदा करती है.
गलत विभाग का उल्लेख: प्रमाण पत्र में “डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक्स एंड स्टेटिस्टिक्स” का नाम दर्ज है, जबकि जन्म प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार पंचायत सचिव या अधिकृत रजिस्ट्रार को होता है.
अधूरा आधार विवरण
माता के आधार नंबर की जगह केवल “XXXX-XX” लिखा गया है. जांचकर्ताओं का मानना है कि यह फर्जी दस्तावेजों में इस्तेमाल होने वाला सामान्य पैटर्न हो सकता है.
₹3,500 से ₹15,000 तक में बिक रहे थे प्रमाण पत्र
ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र के विस्थापित अधिकार मंच के राकेश रंजन महतो ने आरोप लगाया है, कि रुचप पंचायत समेत रसूनिया और चांडिल पंचायतों में भी पैसों के बदले फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाए गए. आरोप है कि प्रत्येक प्रमाण पत्र के लिए ₹3,500 से ₹15,000 तक वसूले गए. पूरे रैकेट में लगभग ₹1.15 करोड़ के लेन-देन की आशंका जताई जा रही है.
घुसपैठ और फर्जी पहचान की आशंका
विस्थापित अधिकार मंच ने आशंका जताई है कि इन फर्जी जन्म प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल आधार कार्ड, वोटर आईडी, राशन कार्ड और अन्य सरकारी दस्तावेज बनवाने में किया जा सकता है. साथ ही सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए भी इनका उपयोग होने की संभावना जताई गई है.
तकनीकी जांच की मांग तेज
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है, कि यह पता लगाया जाए कि ये प्रमाण पत्र किस IP Address और किस कंप्यूटर सिस्टम से तैयार किए गए. क्या किसी कंप्यूटर ऑपरेटर ने बिना अनुमति डिजिटल सिग्नेचर का इस्तेमाल किया. क्या साइबर कैफे और दलालों का कोई नेटवर्क इस पूरे मामले में सक्रिय था.
SIT जांच शुरू और पंचायतों के नाम आने की आशंका
मामले की गंभीरता को देखते हुए चांडिल अनुमंडल पदाधिकारी ने चारों प्रखंड पदाधिकारियों के साथ बैठक की है. प्रशासन ने SIT गठित कर जांच शुरू कर दी है. सभी संदिग्ध प्रमाण पत्रों की जांच कर उन्हें रद्द करने और दोषियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.
सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान अन्य तीन पंचायतों के नाम भी सामने आ सकते हैं. आशंका है कि फर्जी जन्म प्रमाण पत्रों की संख्या आने वाले दिनों में और बढ़ सकती है.
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