Hazaribagh: विनोबा भावे विश्वविद्यालय इन दिनों लगातार चर्चा में है. विश्वविद्यालय में अधिकारों के दुरुपयोग, अनियमितताओं और विरोधियों को व्यवस्थित तरीके से हटाने के आरोप लग रहे हैं. चर्चा है कि कुछ प्रभावशाली लोग विश्वविद्यालय में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए हर संभव हथकंडा अपना रहे हैं, ताकि उनके खिलाफ कोई आवाज न उठ सके.
प्रभारी रजिस्ट्रार को हटाए जाने पर सवाल
चार माह पहले प्रभारी रजिस्ट्रार के पद पर नियुक्त की गईं डॉ. प्रणिता को न सिर्फ पद से हटा दिया गया, बल्कि भविष्य में किसी प्रशासनिक पद पर नियुक्त नहीं किए जाने का आदेश भी जारी कर दिया गया. बताया जा रहा है कि लोकभवन से पत्र जारी होने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने तत्काल अधिसूचना भी जारी कर दी. इसे लेकर विश्वविद्यालय के अंदर कई तरह की चर्चाएं तेज हैं.

प्रभारी कुलपति पर भी कार्रवाई की चर्चा
जानकारी के अनुसार, एक सप्ताह तक प्रभारी कुलपति रहीं समाज विज्ञान संकाय की डीन डॉ. रेणु बोस का नाम भी अब चर्चा में है. बताया जा रहा है कि राज्यपाल सचिवालय से जारी पत्र में उनके फैसलों को रद्द करने और उनके खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया गया है.
महिला अधिकारियों को बनाया जा रहा सॉफ्ट टारगेट?
कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि विनोदिनी तरवे जैसी महिला कुलपति ने जिस विश्वविद्यालय की मजबूत नींव रखी, वहां अब महिला अधिकारियों को ही बिना बड़े आरोपों के सॉफ्ट टारगेट बनाया जा रहा है. इस पूरे मामले को लेकर विश्वविद्यालय और लोकभवन की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं.
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