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70 वर्षों के इंतजार के बाद खुला न्याय का रास्ता: बनासो के पुनर्वासित परिवारों के लिए शुरू हुई म्यूटेशन प्रक्रिया

Hazaribagh: करीब सात दशक से म्यूटेशन की समस्या से जूझ रहे बनासो के पुनर्वासित परिवारों के लिए आखिरकार राहत की किरण दिखाई...

Hazaribagh: करीब सात दशक से म्यूटेशन की समस्या से जूझ रहे बनासो के पुनर्वासित परिवारों के लिए आखिरकार राहत की किरण दिखाई दी है. वर्षों से लंबित इस जटिल मामले के समाधान की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए पुनर्वासित परिवारों के पक्ष में म्यूटेशन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. इस पहल को विस्थापितों ने ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए प्रशासन और संबंधित अधिकारियों के प्रति आभार जताया है.

त्रिपक्षीय बैठक बनी ऐतिहासिक, समाधान पर बनी सहमति

अंचल अधिकारी विष्णुगढ़ के कार्यालय कक्ष में डीवीसी आर.एल. एंड ए. हजारीबाग के अधिकारियों, दामोदर घाटी विस्थापित एवं स्थानीय समन्वय समिति तथा बनासो के पुनर्वासित ग्रामीणों के बीच महत्वपूर्ण त्रिपक्षीय बैठक आयोजित की गई थी. बैठक में वर्षों से लंबित म्यूटेशन विवाद पर गंभीरता से चर्चा की गई और समाधान के लिए सकारात्मक सहमति बनी.

11 परिवारों के पक्ष में पूरी हुई म्यूटेशन प्रक्रिया

बैठक के निर्णय के अनुसार बनासो पंचायत के मुखिया द्वारा पुनर्वासित परिवारों की सूची तैयार कर प्रशासन को सौंपी गई, जिसके आधार पर सूची के क्रम संख्या 11 तक के परिवारों के पक्ष में म्यूटेशन की प्रक्रिया पूरी कर दी गई है. इस कदम से विस्थापित परिवारों में नई उम्मीद जगी है.

अधिकारियों की पहल और ग्रामीणों की एकजुटता लाई रंग

इस महत्वपूर्ण पहल के लिए अंचल अधिकारी नित्यानंद दास की भूमिका को बेहद सराहनीय माना जा रहा है. विस्थापितों और ग्रामीणों ने कहा कि उनकी संवेदनशीलता, सकारात्मक सोच और ईमानदार प्रयासों ने सात दशक पुराने मामले को समाधान की दिशा तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है. लोगों का कहना है कि यह पहल साबित करती है कि प्रशासन यदि इच्छाशक्ति के साथ काम करे तो वर्षों पुरानी समस्याओं का भी सौहार्दपूर्ण समाधान संभव है.

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डीवीसी आर.एल. एंड ए. हजारीबाग के निदेशक राजेश पाठक एवं बैठक में मौजूद सलाहकार राकेश रौशन के सहयोग की भी ग्रामीणों ने खुलकर सराहना की. विस्थापित समिति के सदस्यों ने कहा कि अधिकारियों के सकारात्मक रवैये के कारण लंबे समय से अटकी प्रक्रिया आगे बढ़ सकी.

बैठक में बनासो मुखिया चंद्रशेखर पटेल, पंचायत समिति सदस्य प्रतिनिधि राजू महतो, सुरेश राम, माही पटेल, गुलाब प्रसाद वर्मा, जीतन महतो, चेतन महतो सहित कई ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने सक्रिय भूमिका निभाई. ग्रामीणों की एकजुटता और सामूहिक प्रयास को इस सफलता की सबसे बड़ी ताकत बताया गया.

‘एकता ही शक्ति है’, संघर्ष का मिला परिणाम

दामोदर घाटी विस्थापित एवं स्थानीय समन्वय समिति के केंद्रीय महासचिव उत्पल चक्रवर्ती ने कहा कि यह उपलब्धि विस्थापित परिवारों की एकता, धैर्य और लंबे संघर्ष का परिणाम है. उन्होंने कहा कि “एकता ही शक्ति है” और सामूहिक प्रयासों से ही न्याय की राह आसान होती है.

उन्होंने भरोसा दिलाया कि विस्थापितों के अधिकार, सम्मान और न्याय की लड़ाई में समिति हमेशा उनके साथ खड़ी रहेगी. वहीं ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि बाकी बचे परिवारों की म्यूटेशन प्रक्रिया भी शीघ्र पूरी कर सात दशक पुरानी समस्या का स्थायी समाधान किया जाएगा.

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