मैट्रिक रिजल्ट पर एक्शन, 59 स्कूलों के 400 से ज्यादा शिक्षकों को शो-कॉज, वेतन पर रोक

Hazaribagh: झारखंड अधिविद्य परिषद (जैक) की वार्षिक मैट्रिक परीक्षा-2026 के परिणाम सामने आने के बाद हजारीबाग के शिक्षा महकमे में बड़ा भूचाल...

Hazaribagh: झारखंड अधिविद्य परिषद (जैक) की वार्षिक मैट्रिक परीक्षा-2026 के परिणाम सामने आने के बाद हजारीबाग के शिक्षा महकमे में बड़ा भूचाल आ गया है. जिले का परीक्षा परिणाम संतोषजनक नहीं होने पर उपायुक्त हेमंत सती के कड़े रुख के बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी प्रवीन रंजन ने बड़ी कार्रवाई की है. डीईओ ने जिले के सभी 16 प्रखंडों के 59 सरकारी विद्यालयों (उत्क्रमित उच्च विद्यालय, उच्च विद्यालय और प्लस-टू) के 400 से अधिक शिक्षकों से स्पष्टीकरण (शो-कॉज) पूछा है. मिली जानकारी के अनुसार जारी आधिकारिक पत्र में शिक्षकों को एक सप्ताह के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया गया है. इसके साथ ही डीईओ ने कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित शिक्षकों के मई महीने के वेतन भुगतान पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है.

7वें से 14वें स्थान पर पहुंचा हजारीबाग

इस कार्रवाई की मुख्य वजह हजारीबाग का राज्य स्तरीय रैंकिंग में खराब प्रदर्शन है. साल 2025 में जो हजारीबाग जिला पूरे झारखंड में 7वें स्थान पर था, वह इस वर्ष (2026) खिसककर 14वें स्थान पर पहुंच गया है. डीईओ प्रवीन रंजन ने पत्र में कहा कि स्कूलों में पर्याप्त शिक्षकों की उपलब्धता, नियमित टेस्ट परीक्षा और तमाम संसाधन होने के बावजूद ऐसा निराशाजनक परिणाम आना यह दर्शाता है कि शिक्षक अपने कर्तव्यों के प्रति सजग नहीं हैं. इस लचर प्रदर्शन पर पहले डीसी हेमंत सती ने जिला स्तर पर शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक की थी और परिणाम से असंतुष्ट होकर डीईओ को कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए थे.

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इन 16 प्रखंडों के स्कूलों पर हुई कार्रवाई

सदर, दारू, टाटीझरिया, इचाक, विष्णुगढ़, पदमा, बरही, बड़कागांव, केरेडारी, कटकमदाग, कटकमसांडी, बरकट्ठा, चलकुसा, डाडी, चौपारण और चुरचू प्रखंड के विद्यालय इस कार्रवाई के दायरे में आए हैं.

शिक्षक संघ ने विभाग पर बोला हमला

शिक्षा विभाग की इस एकतरफा कार्रवाई से शिक्षक संगठनों में भारी आक्रोश है. झारखंड राज्य माध्यमिक शिक्षक संघ ने एकजुटता का शंखनाद कर दिया है. संघ के कार्यकारी महासचिव रविंद्र चौधरी ने विभाग पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जब 2026 में मैट्रिक की टेस्ट परीक्षा का सबसे महत्वपूर्ण समय था, तब शिक्षकों को पढ़ाने के बजाय छात्रों के आय, जाति और आवासीय प्रमाण पत्र बनाने के काम में झोंक दिया गया. शिक्षकों को केवल एक या दो नहीं, बल्कि 25 से अधिक गैर-शैक्षणिक कार्यों में नियमित रूप से लगाया जा रहा है.

आंदोलन की चेतावनी के संकेत

उन्होंने कहा कि यह सिर्फ हजारीबाग की नहीं, बल्कि पूरे राज्य की समस्या है. हम दिन-रात मेहनत कर रहे हैं. ऐसे में हमारा हौसला बढ़ाने के बजाय हमारा वेतन रोकना और कार्रवाई करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. शिक्षक संघ ने साफ किया है कि वे बेहतर परीक्षा परिणाम के लिए और कड़ी मेहनत करने को तैयार हैं, लेकिन शिक्षकों को इस तरह प्रताड़ित करना बंद होना चाहिए. विभाग की इस कार्रवाई ने शिक्षकों को आंदोलन और एकजुटता के लिए मजबूर कर दिया है.

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