हजारीबाग की ‘लेडी डॉन’ सिंडिकेट: शाम ढलते ही शुरू होता है ‘है क्या’ का खूनी खेल!

Hazaribagh: शाम के सात बजते ही जब हजारीबाग की सड़कों पर रफ्तार भरती महंगी और आलीशान गाड़ियां किसी खास ठिकाने की तरफ...

Hazaribagh: शाम के सात बजते ही जब हजारीबाग की सड़कों पर रफ्तार भरती महंगी और आलीशान गाड़ियां किसी खास ठिकाने की तरफ मुड़ने लगती हैं, तो समझिए शहर के उस स्याह कोने में हलचल शुरू हो चुकी है जिसे ‘लेडी गैंग का काला साम्राज्य’ कहा जाता है. ऊपर से शांत दिखने वाले हमारे हजारीबाग की रगों में इन दिनों नशे और जरायम का एक ऐसा खतरनाक नेटवर्क दौड़ रहा है, जिसकी स्क्रिप्ट किसी हॉलीवुड थ्रिलर फिल्म जैसी है.

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ड्रग्स, देह व्यापार और वो मौत जिसने खोल दिए हजारीबाग के इस अंडरवर्ल्ड के सारे गहरे राज

शहर से लेकर सुदूर गांवों तक फैले इस अंडरग्राउंड साम्राज्य की कमान एक ऐसी कथित ‘मास्टरमाइंड’ महिला के हाथ में है, जिसने पुलिस की नाक के नीचे अपना समानांतर सिस्टम खड़ा कर लिया है. अफीम, गांजा, बालू-कोयला तस्करी से लेकर जिस्मफरोशी के इस सिंडिकेट के तार अब सीधे राजस्थान और पश्चिम बंगाल से जुड़ रहे हैं.

दहशत और मौत के बीच छिपा राज

यह कोई मामूली कहानी नहीं है. इस खौफनाक खेल का पर्दा तब उठा जब बड़ा बाजार थाना क्षेत्र में पुलिस की नाकेबंदी देखकर एक संदिग्ध महिला के हाथ-पांव फूल गए. खुद को घिरता देख उसने वो कदम उठाया जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी. उसने पुलिस के सामने ही ड्रग्स का पूरा पैकेट निगल लिया. अस्पताल के बिस्तर पर जब उस महिला ने दम तोड़ा, तो पीछे छोड़ गई एक ऐसी गुत्थी जिसने पूरे शहर को हिलाकर रख दिया.

30 फीसदी कमीशन और मजबूरी का फायदा

इस गैंग की कमान संभालने वाली लेडी डॉन सीधे खुद सामने नहीं आती. उसका तरीका बेहद शातिर है. गिरोह की मुख्य कड़ियां पहले गांवों की गरीब और जरूरतमंद महिलाओं को अपनी रडार पर लेती हैं. उन्हें चंद रुपयों और 30 फीसदी के तगड़े कमीशन का ऐसा चश्मा पहनाया जाता है कि वो हंसते-हंसते इस दलदल में उतर जाती हैं. इसके बाद शुरू होता है मौत की पुड़िया बांटने का जमीनी खेल.

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‘है क्या?’- दो शब्दों का वो सीक्रेट कोड

इस धंधे की सबसे हैरान करने वाली बात है इसकी गोपनीयता. अगर आपको इस सिंडिकेट से नशा चाहिए, तो आप सीधे मांग नहीं सकते. इसके लिए एक कोड वर्ड तय है—”है क्या?”. राह चलते या किसी कोने में बोले गए इन दो शब्दों का मतलब सिर्फ और सिर्फ इस गैंग के गुर्गे और उनके बंधे हुए ग्राहक ही समझते हैं. इस मामूली से दिखने वाले कोड के पीछे करोड़ों का काला कारोबार छिपा हुआ है.

ब्यूटी पार्लर और लाइन होटलों का ‘मायाजाल’

जांच की आंच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, चौंकाने वाले सच सामने आ रहे हैं. राजस्थान और बंगाल से भोली-भाली लड़कियों को सुनहरे भविष्य का सपना दिखाकर हजारीबाग लाया जाता है. फिर उन्हें शहर के कुछ नामी ब्यूटी पार्लरों और हाइवे किनारे बने लाइन होटलों के सीक्रेट कमरों में धकेल दिया जाता है. रात के अंधेरे में चलने वाला यह कॉल गर्ल नेटवर्क अब हजारीबाग की शांति को लील रहा है.

स्थानीय लोग भी सहमे हैं

स्थानीय लोग अब सहमे हुए भी हैं और गुस्से में भी. लोगों का कहना है कि अगर इस लेडी गैंग के फन को तुरंत नहीं कुचला गया, तो हजारीबाग की पूरी युवा पीढ़ी इस नशे और अपराध के दलदल में दफन हो जाएगी. हालांकि, पुलिस भी अब आर-पार के मूड में है और बैक-टू-बैक कई महिला तस्करों को सलाखों के पीछे भेजकर इस नेटवर्क की रीढ़ तोड़ने में जुट गई है.

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