JTET में भाषा विवाद बना बड़ा मुद्दा, सरकार पर भेदभाव का आरोप

Ranchi: झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) से मगही, भोजपुरी और अंगिका भाषाओं को बाहर रखने के फैसले ने राज्य की राजनीति और...

Ranchi: झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) से मगही, भोजपुरी और अंगिका भाषाओं को बाहर रखने के फैसले ने राज्य की राजनीति और छात्र संगठनों में उबाल ला दिया है. छात्र नेता राहुल कुमार क्रांति ने सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि यह केवल भाषा का नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के भविष्य का सवाल है.

“भाषा नहीं, युवाओं के भविष्य का सवाल” 

उन्होंने आरोप लगाया कि पलामू, गोड्डा और आसपास के इलाकों के अभ्यर्थियों के साथ सुनियोजित तरीके से अन्याय किया जा रहा है. राहुल क्रांति ने कहा कि एक ओर सरकार स्थानीयता और रोजगार की बात करती है, दूसरी ओर उन्हीं भाषाओं को नजरअंदाज कर रही है जिन्हें राज्य के बड़े हिस्से में लोग बोलते और समझते हैं. 

समन्वय समिति पर उठाए सवाल 

भाषा विवाद को सुलझाने के लिए बनाई गई पांच सदस्यीय समन्वय समिति पर भी उन्होंने सवाल उठाए. उनका कहना है कि JTET आवेदन की अंतिम तिथि 21 मई है, लेकिन समिति की बैठकों का कोई ठोस नतीजा अब तक सामने नहीं आया. ऐसे में अंतिम तारीख गुजरने के बाद फैसला लेना सिर्फ औपचारिकता बनकर रह जाएगा.

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हाईकोर्ट जाने की तैयारी 

राहुल क्रांति ने साफ कहा कि अगर सरकार ने समय रहते फैसला नहीं लिया तो हजारों अभ्यर्थी परीक्षा से बाहर हो जाएंगे. उन्होंने दावा किया कि इस मामले को लेकर राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा जा चुका है और अब झारखंड हाईकोर्ट में कानूनी लड़ाई की तैयारी चल रही है.

हेमंत सोरेन और बंधु तिर्की पर निशाना

उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और पूर्व मंत्री बंधु तिर्की पर भी तीखा निशाना साधते हुए कहा कि मगही, भोजपुरी और अंगिका भाषियों को “बाहरी” समझने की मानसिकता राज्य को बांटने का काम कर रही है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भाषाई समुदायों की उपेक्षा जारी रही तो अलग राज्य की मांग को लेकर केंद्र सरकार से भी मुलाकात की जाएगी.

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अलग राज्य की मांग की चेतावनी

इसके साथ ही राहुल क्रांति ने JTET की न्यूनतम आयु सीमा 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष करने की मांग दोहराई. उन्होंने कहा कि जब CTET और NCTE के नियम 18 वर्ष के प्रशिक्षित युवाओं को मौका देते हैं, तो झारखंड में अलग नियम लागू करना युवाओं के साथ अन्याय है. 26 हजार शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर भी उन्होंने गंभीर सवाल उठाए. उनका आरोप है कि एक ही विज्ञापन के तहत अलग-अलग चरणों में नियुक्ति पत्र बांटकर पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए गए हैं. उन्होंने पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की.

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