Ranchi: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने राज्य के लौह अयस्क क्षेत्रों की मौजूदा स्थिति को लेकर सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि वर्षों से बंद पड़ी खदानों ने पूरे खनन क्षेत्र की आर्थिक रफ्तार थाम दी है और इसका सबसे बड़ा नुकसान स्थानीय युवाओं व छोटे कारोबारियों को उठाना पड़ रहा है. मधु कोड़ा ने कहा कि पश्चिमी सिंहभूम के बड़ाजामदा, नोवामुंडी, गुवा और किरीबुरू जैसे इलाके कभी रोजगार और व्यापार के बड़े केंद्र माने जाते थे, लेकिन आज वहां बेरोजगारी और पलायन आम बात बन चुकी है. उन्होंने आरोप लगाया कि खदानें बंद होने से हजारों परिवारों की आय रुक गई है और बाजारों में भी सुस्ती छा गई है.

कई सेक्टरों में बढ़ी परेशानी
उन्होंने कहा कि सिर्फ मजदूर ही नहीं, बल्कि ट्रांसपोर्ट व्यवसाय, होटल, छोटी दुकानें और दैनिक कमाई पर निर्भर लोग भी आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं. सरकार पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि चुनाव के समय स्थानीय अधिकार और रोजगार की बातें जोर-शोर से होती हैं, लेकिन बाद में जनता को भूला दिया जाता है. मधु कोड़ा ने कहा कि अब लोग अपनी समस्याओं को लेकर खुलकर सामने आने लगे हैं. उन्होंने हाल में गुवा क्षेत्र में हुए आंदोलन का हवाला देते हुए कहा कि जनता के दबाव के बाद ही प्रशासन और प्रबंधन सक्रिय होता दिखता है. उनके मुताबिक यह स्थिति बताती है कि आम लोगों के मुद्दों पर सरकार की गंभीरता कम है.
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खनन क्षेत्र में बड़ा जनआंदोलन की चेतावनी
पूर्व मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि अगर जल्द बंद माइंस चालू कराने, स्थानीय युवाओं को काम देने और प्रभावित परिवारों के लिए ठोस योजना बनाने की दिशा में कदम नहीं उठाए गए, तो खनन क्षेत्र में बड़ा जनआंदोलन खड़ा हो सकता है. उन्होंने कहा कि अब लोग वादों से नहीं, फैसलों और काम से जवाब चाहते हैं.
