गणपति और मूषक: एक अनोखा और पवित्र संबंध

News Wave Desk: जब भी गणेश चतुर्थी आती है, घर-घर में गणपति बप्पा के साथ एक छोटा सा चूहा भी नजर आता...

News Wave Desk: जब भी गणेश चतुर्थी आती है, घर-घर में गणपति बप्पा के साथ एक छोटा सा चूहा भी नजर आता है. क्या आपने कभी सोचा है कि इतने बड़े और ज्ञान के देवता ने अपने वाहन के लिए चूहे को क्यों चुना?

पौराणिक कहानी

कहानी के अनुसार, एक गंधर्व (देवता) था क्रौंच. उसे ऋषि वामदेव ने श्राप देकर चूहा बना दिया. वह चूहा बहुत बड़ा और ताकतवर था, जिसने ऋषि पराशर के आश्रम में बहुत नुकसान किया. फसलें नष्ट कीं, किताबें कुतर डालीं. तब गणपति आए, उन्होंने अपने पाश से उस चूहे को पकड़ लिया. डरकर चूहे ने माफी मांगी और भगवान से प्रार्थना की कि वे उसे अपना वाहन बना लें. गणपति ने उसकी बात मान ली. तभी से चूहा गणेश जी का वाहन बन गया.

इस रिश्ते के 4 संदेश

  1. इच्छाओं पर नियंत्रण: चूहा हर चीज कुतरता है, वैसे ही मन की इच्छाएं भी बढ़ती जाती हैं. गणपति का उस पर बैठना सिखाता है कि हमें अपनी इच्छाओं को कंट्रोल करना चाहिए.
  2. सब जगह पहुंचने वाला ज्ञान: चूहा छोटी-सी जगह में भी घुस जाता है, वैसे ही गणपति का ज्ञान हर जगह पहुंचता है.
  3. विनम्रता: इतने बड़े गणपति का वाहन एक नन्हा चूहा है. इससे हमें सिखना चाहिए कि बड़ा बनने के बाद भी विनम्र रहना जरूरी है.
  4. अज्ञान का नाश: चूहा अंधेरे में रास्ता बना लेता है, वैसे ही गणपति हमारे जीवन से अज्ञान का अंधेरा दूर करते हैं.

लोक परंपरा

महाराष्ट्र में लोग मूषक के कान में अपनी इच्छा कहते हैं, मानते हैं कि वह गणपति तक बात पहुंचा देता है. कई मंदिरों में चूहे की अलग से मूर्ति भी होती है.

गणपति और चूहे का साथ हमें सिखाता है कि प्रकृति में कोई छोटा या बड़ा नहीं होता.

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