रांची में खनन एवं निर्माण उपकरण क्षेत्र को लेकर सरकार–उद्योग संवाद, झारखंड में ₹1.5 लाख करोड़ निवेश की संभावनाओं पर चर्चा

Ranchi: भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के नेशनल माइनिंग एंड कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट डिवीजन (MCED) द्वारा मंगलवार को रांची में झारखंड सरकार और उद्योग...

Ranchi: भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के नेशनल माइनिंग एंड कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट डिवीजन (MCED) द्वारा मंगलवार को रांची में झारखंड सरकार और उद्योग जगत के बीच एक महत्वपूर्ण गवर्नमेंट–इंडस्ट्री राउंडटेबल बैठक आयोजित की गई. बैठक में राज्य में खनन, आधारभूत संरचना, विनिर्माण, तकनीकी नवाचार, निवेश एवं सतत विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई. इसमें झारखंड की ओर से उद्योग एवं खान-भूविज्ञान विभाग के सचिव-सह-जेसएमडीसी अध्यक्ष अरवा राजकमल, खान निदेशक राहुल कुमार सिन्हा, उद्योग निदेशक विशाल सागर तथा जियाडा एवं जिइडको के प्रबंध निदेशक वरुण रंजन शामिल हुए. वहीं उद्योग जगत का प्रतिनिधित्व CII नेशनल माइनिंग एंड कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट डिवीजन के चेयरमैन एवं टीकेआईएल इंडस्ट्रीज लिमिटेड के प्रबंध निदेशक विवेक भाटिया, CII झारखंड स्टेट काउंसिल के चेयरमैन एवं वैदेही मोटर्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक दिलू पारिख तथा टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट और CII झारखंड स्टेट काउंसिल के वाइस चेयरमैन डी बी सुंदर रामम सहित कई प्रमुख उद्योग प्रतिनिधियों ने किया.

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मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का विजन विकसित और समृद्ध झारखंड का निर्माण करना

बैठक को संबोधित करते हुए सचिव अरवा राजकमल ने कहा कि झारखंड सरकार के पास वर्तमान में विभिन्न क्षेत्रों में लगभग ₹1.5 लाख करोड़ का निवेश पाइपलाइन मौजूद है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का विजन विकसित और समृद्ध झारखंड का निर्माण करना है, जिसमें स्थानीय एवं आदिवासी समुदायों की भागीदारी और पुनर्वास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है. उन्होंने बताया कि देश के लगभग 44 प्रतिशत खनिज संसाधन झारखंड में मौजूद है, जिससे राज्य खनन आधारित उद्योगों के लिए सबसे उपयुक्त निवेश गंतव्य बनता है. उन्होंने कहा कि झारखंड माइनिंग इक्विपमेंट निर्माण का बड़ा औद्योगिक केंद्र बनने की क्षमता रखता है.

“सेंटर ऑफ एक्सीलेंस” स्थापित करने की दिशा में कार्य

बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि राज्य सरकार रांची में क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ्स पर केंद्रित “सेंटर ऑफ एक्सीलेंस” स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही है. साथ ही ग्रेफीन, हरित तकनीक, सतत खनन और ऑर्गेनिक एग्रीकल्चर जैसे उभरते क्षेत्रों में संभावनाओं पर भी चर्चा हुई. उद्योग प्रतिनिधियों ने इस दौरान माइन मॉडर्नाइजेशन, नई तकनीकों के उपयोग, स्किल डेवलपमेंट, सतत विकास और सप्लायर इकोसिस्टम को मजबूत करने जैसे विषयों पर सरकार के साथ सहयोग की इच्छा जताई. वहीं 2030 तक कई खदानों की समाप्ति, भूमि उपलब्धता, नीलामी प्रक्रिया और उन्नत तकनीकों के तेज क्रियान्वयन से जुड़ी चुनौतियों को भी उठाया गया.

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CII MCED के चेयरमैन विवेक भाटिया ने क्या कहा?

CII MCED के चेयरमैन विवेक भाटिया ने कहा कि माइनिंग एवं कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट सेक्टर आज औद्योगिक विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण और मैन्युफैक्चरिंग प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रहा है. उन्होंने कहा कि क्रिटिकल मिनरल्स, क्लीन टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रिफिकेशन और आधुनिक खनन प्रणाली आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र के लिए बड़े अवसर लेकर आएंगी. उन्होंने इन-पिट क्रशिंग एंड कन्वेइंग (IPCC) सिस्टम तथा कन्वेयर आधारित कोयला परिवहन को खनन क्षेत्र में सुरक्षा और दक्षता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया. बैठक के दौरान झारखंड सरकार ने आगामी 14 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले CII माइनिंग एंड कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट समिट में भाग लेने की भी सहमति जताई.

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