Ranchi: झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) का विवादों से पुराना नाता रहा है. एक बार फिर यह सुर्खियों में है. परीक्षा आयोजित होने और रिजल्ट जारी होने के बाद मामलों का न्यायालय तक पहुंचना अब लगभग आम बात हो चुकी है. इसका सबसे बड़ा खामियाजा अभ्यर्थियों को भुगतना पड़ता है. उन्हें वर्षों तक नियुक्ति और न्याय का इंतजार करना पड़ता है. साल 2023 में जेपीएससी द्वारा निकाली गई सिविल जज (जूनियर डिवीजन) भर्ती प्रक्रिया भी अबतक अधर में लटकी हुई है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित जांच कमेटी अपनी रिपोर्ट आयोग को सौंप चुकी है, लेकिन इसके बावजूद अबतक संशोधित रिजल्ट प्रकाशित नहीं किया गया है. इससे अभ्यर्थियों में भारी नाराजगी और असमंजस की स्थिति बनी हुई है.

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138 पदों के लिए निकाला गया था विज्ञापन
गौरतलब है कि जेपीएससी ने सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के 138 पदों पर नियुक्ति के लिए वर्ष 2023 में विज्ञापन जारी किया था. मुख्य परीक्षा के बाद उत्तर पुस्तिका और प्रश्नों को लेकर विवाद खड़ा हो गया. अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया था कि आंसर शीट में गंभीर गड़बड़ियां हैं. दो बार संशोधन के बाद आयोग ने 2024 में पहला रिजल्ट जारी किया, लेकिन मामला झारखंड हाईकोर्ट पहुंच गया. कई अभ्यर्थियों ने तीन प्रश्नों की त्रुटि और कैटेगरी-वाइज रिजल्ट प्रकाशित नहीं करने को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. मामले की सुनवाई करते हुए डिवीजन बेंच ने दो गलत प्रश्नों को हटाने और एक प्रश्न के उत्तर को सही करने का आदेश दिया था. साथ ही आयोग को कट-ऑफ तय कर नया रिजल्ट प्रकाशित करने का निर्देश भी दिया गया था.
मामले में जेपीएससी सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था
हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए जेपीएससी सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट को एक विशेषज्ञ कमेटी गठित करने का निर्देश दिया, जिसमें विधि और अंग्रेजी विषय के विशेषज्ञ शामिल किए गए. कमेटी ने जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट जेपीएससी को सौंप दी है, लेकिन आयोग अब तक रिजल्ट जारी नहीं कर पाया है. लंबे समय से परिणाम की प्रतीक्षा कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि लगातार विलंब से उनका भविष्य अधर में लटक गया है. परीक्षा में पूछे गए जिन तीन प्रश्नों पर विवाद हुआ था, उनमें दो विधि और एक अंग्रेजी विषय से संबंधित बताया गया है.
