नारा लगा राजीव गांधी अमर रहे, पर बड़े नेता कहां रहे, रांची में रहकर भी मंत्रियों ने मोड़ा मुंह, अध्यक्ष ने भी मारा शॉर्टकट

Ravi Bharti Ranchi: कहते हैं कि राजनीति में तस्वीरें बहुत कुछ बयां करती हैं, लेकिन कभी-कभी तस्वीरों से गायब रहने वाले लोग...

Ravi Bharti

Ranchi: कहते हैं कि राजनीति में तस्वीरें बहुत कुछ बयां करती हैं, लेकिन कभी-कभी तस्वीरों से गायब रहने वाले लोग उससे भी बड़ा बयान दे जाते हैं. गुरुवार को झारखंड प्रदेश कांग्रेस कार्यालय का नजारा कुछ ऐसा ही था, जहां देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को श्रद्धांजलि तो दी गई, लेकिन श्रद्धा में भारी कमी और राजनीतिक व्यस्तताओं की अधिकता साफ नजर आई.

सुबह 11:30 बजे जेपी चौधरी सभागार में आयोजित इस सभा में पार्टी के दिग्गज नेताओं की सामूहिक अनुपस्थिति ने एक नया ही सियासी रायता फैला दिया है.

 

अमर रहे के नारे और सूने सोफे

सभागार में कार्यकर्ताओं और चंद निष्ठावान पदाधिकारियों ने राजीव गांधी की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित की और “राजीव गांधी अमर रहे” के गगनभेदी नारे भी लगाए.

नारे हवा में गूंजते रहे, लेकिन उन्हें सुनने के लिए कांग्रेस कोटे के रसूखदार कानों की भारी कमी रही. कार्यकर्ताओं का जोश तो हमेशा की तरह हाई था, पर मंच और अगली कतारें पार्टी के माननीयों के बिना अनाथ महसूस कर रही थीं.

मंत्रियों के पास वक्त नहीं

चर्चाओं का बाजार इस बात को लेकर गर्म है कि आखिर कांग्रेस के बड़े नेता, विधायक और मंत्री इस मौके पर कहां थे?

सूत्रों की मानें तो कांग्रेस कोटे के चार मंत्रियों में से दो रांची में ही मौजूद थे. वे बकायदा अपने विभागीय कार्यक्रमों में फाइलें पलटने में मशगूल थे, लेकिन महज चंद कदमों की दूरी पर स्थित प्रदेश कार्यालय आकर अपनी ही पार्टी के सबसे बड़े राष्ट्रीय नायक को दो फूल चढ़ाने की फुर्सत उन्हें नहीं मिली.

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अध्यक्ष जी का टच एंड गो एक्शन

अब बात संगठन के मुखिया यानी प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश की. उन्होंने औपचारिकता का बखूबी निर्वहन किया. रांची में राजीव गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण का शॉर्टकट निपटाया और तुरंत बोकारो के लिए रवाना हो गए. वहां वे एक अन्य प्रतिमा के अनावरण कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे. यानी, जो वक्त रांची के कार्यकर्ताओं के साथ बैठकर आत्ममंथन और शोक जताने का था, वह बोकारो के सफर की धूल में उड़ गया.

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