Hazaribagh: जिले में गर्मी अब और विकराल रूप लेने जा रही है. 25 मई से शुरू हो रहे “नौतपा” को लेकर मौसम विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि आने वाले छह से नौ दिनों तक हजारीबाग समेत पूरे उत्तरी छोटानागपुर क्षेत्र में तेज धूप, गर्म पछुआ हवाएं और उमस लोगों की परेशानी बढ़ा सकती हैं. दिन का तापमान 42 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंचने की संभावना जताई जा रही है, जबकि रात में भी गर्म हवाओं से राहत मिलने के आसार कम हैं.

पिछले कुछ दिनों से हजारीबाग शहर और आसपास के इलाकों में सुबह से ही तेज धूप और दोपहर में तेज तपिश महसूस की जा रही है. ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और गंभीर बनी हुई है, जहां खेतों और सड़कों पर दोपहर के समय सन्नाटा दिखने लगा है. बिजली कटौती और पानी की समस्या ने लोगों की परेशानियां और बढ़ा दी हैं.
क्या होता है नौतपा?
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है, तब शुरू होने वाले शुरुआती नौ दिनों को नौतपा कहा जाता है. मान्यता है कि यह वर्ष का सबसे गर्म दौर होता है. मौसम वैज्ञानिक भी इस दौरान उत्तर भारत और झारखंड में तापमान बढ़ने की संभावना जताते हैं.
बारिश हुई तो कमजोर पड़ सकता है मानसून?
स्थानीय ज्योतिषाचार्यों और मौसम जानकारों के बीच इस बात को लेकर भी चर्चा है कि यदि नौतपा के दौरान लगातार बारिश होती है तो मानसून कमजोर पड़ सकता है. हालांकि, मौसम वैज्ञानिक इसे वैज्ञानिक रूप से पूरी तरह प्रमाणित नहीं मानते, लेकिन ग्रामीण इलाकों में यह धारणा अब भी काफी प्रचलित है.
छह दिन बाद बदल सकता है मौसम
मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार, मई के अंतिम सप्ताह या जून की शुरुआत में हल्की बारिश और आंधी की संभावना बन सकती है. इससे तापमान में कुछ गिरावट आएगी और लोगों को राहत मिल सकती है. फिलहाल अगले एक सप्ताह तक हजारीबाग में शुष्क और गर्म मौसम बने रहने का अनुमान है.
स्वास्थ्य विभाग ने जारी की सलाह
तेज गर्मी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे तक अनावश्यक बाहर नहीं निकलने की अपील की है. डॉक्टरों ने बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है. अधिक पानी पीने, हल्के कपड़े पहनने और धूप में निकलते समय सिर ढकने की सलाह दी गई है.
किसानों की बढ़ी चिंता
नौतपा की तेज गर्मी ने किसानों की चिंता भी बढ़ा दी है. खेतों में नमी तेजी से कम हो रही है और कई तालाबों का जलस्तर नीचे जाने लगा है. किसान अब मानसून की समय पर दस्तक का इंतजार कर रहे हैं, ताकि खरीफ फसलों की तैयारी शुरू हो सके.
