Hazaribagh: भीषण गर्मी की मार झेल रहे हजारीबाग में अब पानी का संकट लोगों के सब्र को तोड़ने लगा है. शहर के कई मोहल्लों में बीते एक महीने से नलों में पानी नहीं आया है. हालात ऐसे हैं कि लोग सुबह से बाल्टी और डिब्बा लेकर सार्वजनिक नलों के पास पहुंचते हैं, लेकिन घंटों इंतजार के बाद खाली हाथ लौटने को मजबूर हैं. गर्मी और जल संकट की दोहरी मार ने आम लोगों का जीवन बेहाल कर दिया है. शहर के ओकनी इलाके में पानी टंकी के पास लगा सार्वजनिक नल, जहां कभी सुबह-सुबह लोगों की भीड़ पानी भरने के लिए उमड़ती थी, अब पूरी तरह सूखा पड़ा है.

उम्मीद लेकर जाते हैं, मायूसी लेकर लौटते हैं
ओकनी निवासी मुक्कु अग्रवाल बताते हैं कि पिछले एक महीने से इलाके में पानी की भारी किल्लत है. कई बार शिकायत की गई, लेकिन समाधान के नाम पर सिर्फ आश्वासन मिला. उनका कहना है कि इस भीषण गर्मी में पानी जैसी बुनियादी जरूरत के लिए भी लोग दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन जिम्मेदारों को जनता की परेशानी दिखाई नहीं दे रही. स्थानीय लोगों का कहना है कि अब हालात इतने खराब हो चुके हैं कि घरों में पीने तक का पानी जुटाना मुश्किल हो गया है. महिलाएं और बच्चे सुबह से पानी की तलाश में इधर-उधर भटक रहे हैं.
पाइपलाइन बिछी, लेकिन पानी गायब
शहर में नल-जल योजना के तहत पाइपलाइन तो बिछा दी गई, लेकिन कई इलाकों में आज तक नियमित जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी. लोगों का आरोप है कि योजनाओं का प्रचार तो खूब हुआ, लेकिन जमीनी व्यवस्था पूरी तरह फेल साबित हो रही है. ओकनी समेत कई मोहल्लों में लोगों के घरों तक पाइप पहुंच गए, मगर नलों में पानी नहीं पहुंचा. अब लोग पूछ रहे हैं कि आखिर करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी उन्हें बूंद-बूंद पानी के लिए क्यों तरसना पड़ रहा है.
जनता पूछ रही सवाल
स्थानीय नागरिकों में इस बात को लेकर भी नाराजगी है कि जनप्रतिनिधि जनता की समस्या से ज्यादा आपसी खींचतान और राजनीतिक गतिविधियों में व्यस्त दिखाई दे रहे हैं. लोगों का कहना है कि कोई क्रिकेट आयोजन में व्यस्त है तो कोई राजनीतिक विवादों में उलझा हुआ है, लेकिन शहर की सबसे बड़ी समस्या पर किसी का ध्यान नहीं है. मेयर की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं. लोगों का आरोप है कि नगर निगम की ओर से न तो कोई स्पष्ट व्यवस्था की जा रही है और न ही संकटग्रस्त इलाकों में वैकल्पिक जलापूर्ति सुनिश्चित की जा रही है.
