Ranchi: देश में बच्चों के अधिकारों की रक्षा और उनके खिलाफ होने वाले गंभीर अपराधों पर पूर्ण विराम लगाने के उद्देश्य से एक विशाल राष्ट्रव्यापी पहल की शुरुआत की गई है. नई दिल्ली स्थित ऐतिहासिक कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में 27 से 30 जुलाई तक आयोजित चार दिवसीय राष्ट्रीय परामर्श सम्मेलन में वर्ष 2026-2027 के ‘नेशनल कैंपेन’ का आधिकारिक बिगुल फूंक दिया गया.
इस महत्वपूर्ण अभियान का आयोजन जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन्स द्वारा किया गया, जिसमें देशभर से बाल अधिकार कार्यकर्ताओं, नागरिक समाज संगठनों और कानून विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया.
36 राज्यों और 782 जिलों में चलेगा राष्ट्रव्यापी अभियान
इस राष्ट्रीय अभियान का सीधा उद्देश्य भारत को बाल विवाह, बाल मजदूरी और मानव तस्करी जैसी सामाजिक कुरीतियों और अपराधों से पूरी तरह मुक्त कराना है.आगामी वर्ष 2026-2027 के दौरान यह अभियान भारत के सभी 36 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के 782 जिलों में व्यापक स्तर पर संचालित किया जाएगा। जमीनी स्तर पर असरदार बदलाव लाने के लिए यह अभियान 4P मॉडल पर काम करेगा.

- – जन-जागरूकता के जरिए अपराधों को घटित होने से रोकना
- – पीड़ित बच्चों को तत्काल सुरक्षा प्रदान करना
- – दोषियों को सख्त से सख्त कानूनी सजा दिलाना
- – प्रशासन और समाज के साथ मिलकर काम करना
झारखंड की प्रभावी भूमिका: चाइल्ड राइट्स फाउंडेशन ने किया प्रतिनिधित्व
राष्ट्रीय परामर्श कार्यक्रम में झारखंड की ओर से चाइल्ड राइट्स फाउंडेशन, रांची के सचिव बैद्यनाथ कुमार ने सक्रिय भागीदारी निभाई और राज्य में बाल संरक्षण की स्थिति व चुनौतियों को प्रमुखता से रखा. सम्मेलन को संबोधित करते हुए बैद्यनाथ कुमार ने कहा: बाल विवाह, मानव तस्करी और बाल श्रम जैसी समस्याएं किसी भी सभ्य समाज के लिए अभिशाप हैं. जब तक हमारे देश का हर बच्चा सुरक्षित और शिक्षित नहीं होगा, तब तक एक सशक्त भारत का सपना अधूरा है. 2026-2027 का यह राष्ट्रीय अभियान हर जिले और गांव तक पहुंचकर बच्चों को उनके संवैधानिक अधिकार दिलाने और उन्हें शोषण से बचाने में मील का पत्थर साबित होगा.
झारखंड सहित पूरे देश में नागरिक समाज और प्रशासन मिलकर इसे सफल बनाएंगे.
