हजारीबाग : कोयला के काले खेल में उतरे सफेदपोश, धनबाद की तरह सुलग रही वर्चस्व की आग

Hazaribagh : जिला धीरे धीरे सूबे की कोयला राजधानी कहे जाने वाले धनबाद की राह पर बढ़ता दिख रहा है. जहां कोयला...

Hazaribagh :  जिला धीरे धीरे सूबे की कोयला राजधानी कहे जाने वाले धनबाद की राह पर बढ़ता दिख रहा है. जहां कोयला माफियाओं और नेताओं के बीच वर्चस्व को लेकर अदंरूनी खींच तान की चर्चा तेज है. सूत्रों की मानें तो धनबाद में कभी अपना राज चलाने वाले दो बड़े सेंट्रल पावर्स अब हजारीबाग की जमीन पर अपना दबदबा कायम करने में पूरी ताकत से जुट गए हैं. सबसे चौंकाने वाली चर्चा तो यह है कि स्थानीय स्तर के एक प्रभावशाली नेता का साथ मिलने के बाद इस सिंडिकेट का नेटवर्क हजारीबाग में तेजी से फैल रहा है.

लड़ाई का केंद्र कटकमदाम रेशम क्षेत्र

जिले के बेश क्षेत्र से लेकर बड़कागांव तक फैली कोल परियोजना को लेकर ये खींच तान जारी है. जहां डंपिंग यार्ड, कोयला ट्रांसपोर्टिंग, लोडिंग और ठेकेदारी के खेल में किसका नियंत्रण रहेगा. इसे लेकर खींचतान अब चरम पर पहुंच गया है. इस वर्चस्व की लड़ाई का सबसे ताजा केंद्र कटकमदाग का बेश रेशम क्षेत्र है. यहां प्रस्तावित नए डंपिंग यार्ड को लेकर दो बड़े सफेदपोश नेताओं के बीच रस्साकशी की चर्चा इन दिनों हवा में तैर रही है. इस नए डंपिंग यार्ड पर कब्जे को लेकर स्थानीय छुटभैया नेताओं में भी आपस में गुत्थम गुत्थी मची हुई है. अब क्षेत्र के छोटे नेताओं को कोयला, छर्री, समेत शहर की हर अवैध गतिविधि में सीधे तौर पर पार्टनरशिप और दलाली का बड़ा हिस्सा चाहिए.

कंपनियों ने बनाया नेटवर्क

कोल कंपनियों ने भी इलाके में अपना काम निर्बाध रूप से चलाने के लिए नया हथकंडा अपनाया है. स्थानीय विरोध को दबाने, ट्रांसपोर्टिंग को मुट्ठी में रखने और अवैध वसूली के पूरे सिस्टम को मैनेज करने के लिए कंपनियों ने अपने अपने ‘दबंग नेटवर्क’ तैयार कर रखे हैं. इस नेटवर्क से जुड़े लोगों को हर महीने मोटी रकम बतौर सैलरी दिए जाने की चर्चा पूरे इलाके में आम है. बेरोजगारी और गरीबी का फायदा उठाकर स्थानीय युवाओं को इस कथित सिंडिकेट का हिस्सा बनाया जा रहा है. कुछ स्थानीय युवाओं को महज छोटे दलाल के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है. जबकि आम ग्रामीणों और विस्थापितों के हाथ में केवल झुनझुना थमा दिया गया है.

गांवों में चर्चा किसी हुकूमत चलेगी

कोयला क्षेत्र में अचानक बढ़ती करोड़ों की लग्जरी गाड़ियों की संख्या, बाहुबलियों की सक्रियता, राजनीतिक हलचल और सरेआम धनबल का प्रदर्शन कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है. ग्रामीण इलाकों में अब यह सवाल खुलकर उठने लगा है कि आखिर किस गांव में किसकी हुकूमत चलेगी. किस सड़क पर किसका कब्जा होगा और किसे काम मिलेगा. यह सब अब देश के कानून से नहीं, बल्कि बाहुबल और पैसों के दम पर तय किया जा रहा है.

बड़ी चेतावनी : समय रहते लगाम नहीं लगी, तो धनबाद की तरह बहेगा खून

हजारीबाग के ही एक जनप्रतिनिधि ने वर्षों पहले यह चेतावनी दी थी कि यदि प्रशासन ने समय रहते कदम नहीं उठाए, तो आने वाले दिनों में जिले की स्थिति भी धनबाद जैसी हिंसक हो सकती है. जिस तरह सालों तक धनबाद में कोयला सिंडिकेट के दबदबे के कारण सरेआम लाशें गिरती थीं और गैंगवार का लंबा खूनी इतिहास लिखा गया. वैसा ही खौफनाक माहौल अब हजारीबाग में भी आकार लेता दिखाई दे रहा है. अगर समय रहते इस बढ़ते नापाक गठजोड़ पर नकेल नहीं कसी गई, तो आने वाले दिनों में कोयले की यह जंग सामाजिक तनाव, संगीन अपराधों और खूनी संघर्ष का रूप ले सकती है. हजारीबाग के शांत माहौल पर मंडराता यह खतरा अब शासन, प्रशासन और सरकार तीनों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है.

 

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