Jamtara: नारायणपुर प्रखंड के सुदूरवर्ती पिलवारी-शहरपुर वन गांव में पेयजल संकट गहराता जा रहा है. करीब 150 की आबादी वाले इस आदिवासी एवं अल्पसंख्यक बहुल गांव में लगभग 25 परिवार निवास करते हैं, जहां लोग इन दिनों जोरिया में बने डोभा का पानी पीने को मजबूर हैं. गांव में पेयजल सुविधा के लिए विभाग द्वारा लगाए गए तीन चापाकलों में से दो खराब पड़े हैं, जबकि एक चापाकल से बेहद कम पानी निकल रहा है. इससे ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

पानी के लिए रोजाना संघर्ष
भीषण गर्मी के बीच गांव के लोग हड़िया, डेकची, बाल्टी और गैलन लेकर लगभग एक किलोमीटर दूर जोरिया पहुंचते हैं और डोभा या चट्टानों के बीच बने चूवा से पानी भरकर लाते हैं. इसी दूषित पानी का उपयोग पीने से लेकर खाना बनाने और अन्य घरेलू कार्यों में किया जा रहा है.

ग्रामीणों ने जताई बीमारी की आशंका
ग्रामीण शिवलाल मुर्मू, दर्शन किस्कू, कयुमुद्दीन मियां, जियामुनी हेंब्रम, मुकेश हेंब्रम, बसु किस्कू, उपासी मुर्मू, बाबूजन मुर्मू और सोनामुनी सोरेन ने बताया कि दूषित पानी पीने से बीमारी फैलने का खतरा बना रहता है. उन्होंने खराब पड़े चापाकलों की मरम्मत कराने तथा नया चापाकल लगाने की मांग की है.
वर्षों से बनी हुई है पानी की समस्या
वहीं सफीक अंसारी, सौल मियां, हासिम खातून और भालू मुनि सोरेन ने कहा कि गांव में वर्षों से पानी की किल्लत बनी हुई है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया. एकमात्र चालू चापाकल से भी केवल दो से तीन बाल्टी पानी ही निकलता है, जिससे पूरे गांव की जरूरत पूरी नहीं हो पाती.

जनप्रतिनिधि ने उठाई स्थायी समाधान की मांग
पिठवाड़ीह-2 के वार्ड सदस्य सुधीर मोहाली ने बताया कि गांव के लोग हर साल गर्मी में पानी की गंभीर समस्या झेलते हैं. उन्होंने प्रशासन से अविलंब स्थायी समाधान करने की मांग की.

PHED ने दिया जल्द मरम्मत का भरोसा
इधर मामले को लेकर पीएचईडी विभाग के एसडीओ अशोक पासवान ने कहा कि मामला संज्ञान में आया है और खराब चापाकलों की जल्द मरम्मत कराई जाएगी. उन्होंने बताया कि “हर घर जल योजना” का निर्माण कार्य जारी है. योजना पूर्ण होने के बाद इस क्षेत्र की पेयजल समस्या का स्थायी समाधान हो सकेगा. विभाग का अनुमान है कि लगभग एक वर्ष में कार्य पूरा हो जाएगा.
