Dhanbad: आर्ट ऑफ लिविंग के अंतर्ज्ञान उत्सव ने मानव संभावनाओं के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक अध्याय रचा है. 11,000 से अधिक बच्चे और अभिभावक इस अद्भुत आयोजन के सहभागी बने. इनमें 50 ऐसे बच्चे भी शामिल हुए जिन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान प्राप्त हो चुका है. झारखंड के 50 बच्चों ने भारत के सबसे बड़े अंतर्ज्ञान आयोजन में हिस्सा लिया. मानव चेतना और अंतर्ज्ञान की विलक्षण क्षमताओं के अभूतपूर्व प्रदर्शन के रूप में उभरे इस विराट आयोजन में आर्ट ऑफ लिविंग के इंट्यूशन प्रोसेस से जुड़े 11,000 से अधिक बच्चे और उनके अभिभावक आर्ट ऑफ लिविंग अंतर्राष्ट्रीय केंद्र में एकत्रित हुए. ध्यान, विज्ञान, आनंद और मानवीय संभावनाओं के अद्वितीय अनुभवों से परिपूर्ण यह दिन सभी के लिए विस्मयकारी रहा.

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50 बच्चों ने आंखों पर पट्टी बांधकर घुमावदार सड़कों और मोड़ों पर चलाया साइकिल
इस भव्य आयोजन में बच्चों ने आंखों पर पट्टी बांधकर पढ़ना, स्मरण-आधारित गतिविधियां, तीव्र पैटर्न पहचान, ब्लाइंडफोल्ड टिक-टैक-टो, चित्रों की हूबहू प्रतिकृति बनाना जैसी अनेक अंतर्ज्ञानात्मक क्षमताओं का प्रदर्शन किया. लेकिन उपस्थित जनसमूह को जो सर्वाधिक आश्चर्यचकित किया, वह था 50 बच्चों का आश्रम परिसर की घुमावदार सड़कों और मोड़ों पर आंखों पर पट्टी बांधकर साइकिल चलाना. यह सब आर्ट ऑफ लिविंग के ‘इंट्यूशन प्रोसेस’ में सिखाई गई नियमित साधनाओं के अभ्यास का परिणाम था. दृश्य भले ही जादुई प्रतीत हो रहे थे, परंतु ये सब केंद्रित जागरूकता, ध्यान, श्वास-प्रक्रियाओं, भावनात्मक संतुलन और उन्नत संवेदनशीलता के माध्यम से भीतर निहित अंतर्ज्ञान शक्ति को पुनः जागृत करने का परिणाम मात्र थे.
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